सर्वथा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वथा – Sarvathaa. In every way, in every respect, entirely. पूर्णतः, हर तरह से ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वथा – Sarvathaa. In every way, in every respect, entirely. पूर्णतः, हर तरह से ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्य अलड्करण – Bhavya Alankarana. Great ornamentation. भव्यता के साथ सुशोभित करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृद्धि – Vrddhi. Growth, Increase, Development विकास, बढ़ोत्तरी, पूर्व स्वभाव को कायम रखते हुए भावान्तररूप से अधिकता हो जाना व्रद्धि है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्पगत – Sarvagata.. Omnipresent, all-pervading. सर्वव्याप्त-सभी जगह फैला हुआ। केवलज्ञान के सर्व लोकालोक को जानने के कारण जीव सर्वगत या सर्वव्यापी कहलाता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा लब्धि :Synonym of Shruggyan (scriptural knowledge.) श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलमति – Vipulamati. A type of telepathic knowledge (Manah Paryay Gyan). मन: पर्यय ज्ञान के दो भेदों में दूसरा भेद; जो ज्ञान दूसरे के मन में स्थित सरल और कुटिल सब बातों को जान लेता है ” अर्थात् चिन्तित, और अर्ध – चिन्तित को भी जान लेता है “
चतुष्टयी वृत्ति Four uses of money (acquisition, saving or protection, growth, expenses). अर्थ की ४ वृत्तियाँ -अर्जन ,रक्षण ,वर्धन ,व्यय ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सराग छद्मस्थ – Saraaga Chhadmastha. Souls at the 4th to 10th stage of spiritual development. छद्मस्थ के दो भेदो मे एक भेद। चौथे से दसवें गुणस्थान वाले जीव सराग छद्मस्थ कहलाते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।