सक्रिय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सक्रिय – Sakriya. Active. क्रियाशील या गतिशील, परिस्पंदन “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य चिह्न – Bahya Cinha. External symbolic significances (reg. laugh,love , peace etc.). वस्तु की पहचान कराने वाले बाहरी चिन्ह जैसे – प्रसत्रचित रहना, धर्म से प्रेम करना, शुभ उपयोग रखना आदि धर्मध्यान के बाह्य चिह्न कहलाते है “
इन्द्रियावलोकन अब्रह्म Attraction towards the beauty of ladies. स्त्रियों के मनोहर अंगों को राग भाव से देखने रूप कुशील।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनिमित्तक – Bhavanimittaka. Maturity of karmas (caused by any life course). A type of a Avadhigvan (clairvoyance). भव का निमित पाकर कर्मों का उदय में आना , भवप्रत्यय अवधिज्ञान भी भवनिमित्तक होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर स्तोत्र – Bhaktamara Stotra. A great spiritual hymn written by Acharya Mantung on Lord Adinath. आचर्य मानतुंग (ई.श. ७ पूर्व) द्वारा संस्क्रत में रचित आदिनाथ भगवान का स्तोत्र ” इसमें ४८ काव्य हैं ” इस स्तोत्र के प्रभाव से उनकी बेड़ियाँ स्वयं टूट गई थीं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भीमारण्य – Bhimaranya. A terribly dense forest of Videh Kshetra (region). विदेहक्षेत्र के मनोहर नगर का समीपवर्ती एक भंयकर वन “
एषणासमिति Carefulness in alms, food accepting for saints. 5 समिति में एक समिति-मुनि का 46 दोषों से रहित आहार ग्रहण करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उद्धभाषण True speech. सत्यव्रत की 5 भावनाओं में एक भावना-आगमानुकूल वचन बोलना, इसे अनुवीचिभाषण भी कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]