प्रवृत्ति मार्ग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रव्रत्ति मार्ग- भक्ति प्रधान धर्म, जहां व्यवहार धर्म की तरफ अधिक झुकाव हो अर्थात गृहस्थ धर्म। Pravrtti marga- Households tendency related to religious conduct
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रव्रत्ति मार्ग- भक्ति प्रधान धर्म, जहां व्यवहार धर्म की तरफ अधिक झुकाव हो अर्थात गृहस्थ धर्म। Pravrtti marga- Households tendency related to religious conduct
देवचतुष्क Quartet of particular Karmic nature (reg. celestial beings). देवगति, देवगत्यानुपूर्वी , वैक्रियिक शरीर व वैक्रियिक अंगोपांग इन 4 कर्मप्रकृतियों का समूह। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चन्द्रप्रभ A disciple of Jaysingh Suri. जयसिंह सूरि के शिष्य जिन्होंने प्रमेयरत्नकोष तथा दर्शनशुद्धि नामक न्यायविषयक दो ग्रन्थ लिखे . समय- ई. ११२० ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान कषाय- pratyakhyana kasaya Obscuring passion in observing abstinent vows. पूर्ण व्रत या संयम के पालन में बाधक कशाय, इसकी अवधि 15 दिन की होती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतीति- pratiti Experience, conviction, belief द्रिष्टि श्रधा रुचि।
दिशा- विदिशा Directions & subdirections. पूर्व पश्चिम आदि 4 दिशा एंव ईशान आग्नेय आदि 4 विदिशा कहलाती हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रमित्र – Bhadramitra. Name of the counselor of the king of Sinhpu, another name is Satyaghosh. सिंहपुर के राजा का मंत्री, अपरनाम सत्यघोष ” आगे चौथे भव में मोक्ष प्राप्त किया “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान संयत – Svasthaana Sammyata. See- Svasthaana Apramatta. देखे- स्वस्थान अप्रमत्त। मूल व उत्तर गुणो से मिण्डत, व्यक्त व अव्यक्त परिणाम से रहित कषायो का अनुपशामक व अक्षपक होते हुए भी ध्यान मे लीन अप्रमत्तसंयत स्वस्थान अप्रमत्त कहलाता है।
दृश्यचित्र Landscape painting, picturesque.दिखलाई देने वाला चित्र।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == कृपणता : == करिणो हरि—नहरविदारियस्स दीसंति मुत्तिया कुम्मे। अहव किवणाण मरणे पथडच्चिय होंति भंडारा।। —गाहारयण कोष : १५५ िंसह के नख से विदारित होने पर हाथी के कुम्भस्थल में मोती दिखाई पड़ते हैं अथवा कृपणों के मरने पर ही उनका भंडार (धन) प्रकट होता है। सोसं न गओ…