रक्तोदा कूट!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्तोदा कूट – रक्तोदा कुंड में स्थित कूट। Raktoda Kuta-name of a summit situated in Raktoda Kund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्तोदा कूट – रक्तोदा कुंड में स्थित कूट। Raktoda Kuta-name of a summit situated in Raktoda Kund
चन्दन कथा A book written by Acharya Shubhchandra-5. आचार्य शुभचन्द्र -५ (ई. १५१६-१५५६) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समंतभद्र – Samantabhadra.Name of great Acharya, the writer of Svayambhu Stotra, Tattvanushasan, Ratnakarandashravaka-chr etc. many great treatises. आचार्य सिद्वसेन के उत्तरवर्ती एक आचार्य। स्वयम्भू स्तोत्र, स्तुति विद्या, देवागम स्तोत्र, युक्त्यानुशासन, तत्वानुशासन, जीवसिद्वि, प्राकृत व्याकरण, रत्नकरण्डश्राावकाचार आदि अनेक ग्रंथो के रचयिता संस्कृत कवि, वादी, वाग्मी, गमक, तार्किक आदि उपाधियो से समन्वित एक प्रसिद्व आचार्य।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रघु – इक्ष्वाकु वंष में अयोध्या नगरी के राजा। अनरण्य का पिता और दषरथ का दादा। Raghu-A king of Ayodhya city of Ikshvaku Dynasty
गृहिमूलगुणाष्टक 8 basic restraints of householders. गृहस्थ के ८ मूलगुण; ५ अनुव्रतों का पालन, मद्य, मांस, न्मधू का त्याग (रत्नकरण्ड के अनुसार)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मघा – Magha. Name of a lunar. एक नक्षत्र ” तीर्थं कर सुमतिनाथ का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्थान विचय – Sansthaana Vichaya. A type of religious contemplation about different dimensions of Teen Lok- three worlds. धर्मध्यान का चौथा भेद ” तीन लोक के संस्थान प्रमाण, भेद आदि का चिंतन करना ” इसके पिंडस्थ, पदस्थ, रूपस्थ और रूपातीत ये 4 भेद हैं “
गुप्त वंश Dynasty of Gupt’s. चंद्रगुप्त से ब्स्कंदगुप्त भानुगुप्त तक चलने वाला वंश , समय – ई.३२०-507।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त त्याग प्रतिमा – Sachitta Tyaaga Pratimaa. The 5th model stage of spiritual development of lay follower related to the renunciation of raw vegetation (without making pieces of it) etc. श्रावक की 11 प्रतिमाओं में 5वीं प्रतिमा; कच्चे फल-फूल , बीज, पत्ते, आदि नही खाना, इन्हें छिन्न-भिन्न करके, लवण आदि मिलाकर या गरम आदि…
गुणीनय A standpoint by which soul is supposed to accept virtues. आत्मद्रव्य गुणी नय से गुणग्राही है, शिक्षक के द्वारा जिसे शिक्षा दी जाती है ऐसे कुमार की भाँति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]