त्रिमूढता!
त्रिमूढता Three faults in right faith. सम्यग्दर्शन के 25 दोषों में 3 दोष । लोक मूढता, देवमूढता, गुरूमूढता । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिमूढता Three faults in right faith. सम्यग्दर्शन के 25 दोषों में 3 दोष । लोक मूढता, देवमूढता, गुरूमूढता । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चंदप्पहचरिउ A book written by Brahmadamodar. ब्रह्मदामोदर द्वारा रचित चनराप्रभ चरित्र. समय- ई. ११ मध्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वसमीक्षा Name of a commentary book written by Vachaspati Mishra. वेदांत साहित्य प्रवर्तक वाचस्पति मिश्र (ई. 840) की व्रह्मसिद्धि पर लिखी समीक्षा।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गृहीत द्रव्य Acquired matter, changed form of matter. ग्रहण किया गया द्रव्य, द्रव्य परिवर्तन ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
घातिया कर्म Destructive Karmas. जिसके उदय से जीव के ज्ञानादि अनुजीवी गुणों का घात होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मगधसारनलक- Magadhasaranalaka. Name of a city situated in the south of Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर “
तेज Lustre, Glitter, fire. गर्मी, चमक, दीप्ति, प्रभा , प्रकाश, अग्नि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
घ The fourth consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का चतुर्थ व्यंजन , इसका उच्चारण-स्थान कण्ठ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्तभंगी तरंगिणी – Saptabhamgii Taramginii. Name of a treatise written by Vimaldas on Nyaya philosophy. विमलदास (श्रावक) (ई.श. 14-15) कृत संस्कृत भाषा का न्याय विषयक ग्रंथ।