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ट The eleventh consonant of the Devanagari syllabary.देवनागरी लिपि का ग्यारहवाँ व्यंजन अक्षर, इसका उच्चारण स्थान मूर्धा है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
ट The eleventh consonant of the Devanagari syllabary.देवनागरी लिपि का ग्यारहवाँ व्यंजन अक्षर, इसका उच्चारण स्थान मूर्धा है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहिस्तत्त्व- तत्त्व का एक भेद; तत्त्व बहिस्तत्त्व और अन्तस्तत्त्वरुप परमात्मा तत्त्व ऐसे भेदों वाले होते है। Bahistattva- The external element
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बालपंडितमरण- सम्यग्दृष्टि देशव्रती श्रावक का मरण। Balapanditamarana- Death of a well conducting householder
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलदेव- बलभद्र; नारायण के बड़े भई, ये संख्या में 9 होते हैं एवं स्वर्ग या मोक्ष जाते है। Baladeva- A type of great personages
उपशमसम्यग्दृष्टि One who acquires right faith due to upasham. उपशम सम्यक्त्व को प्राप्त करने वाला।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बन्ध (पुण्य-पाप)- पुण्य एवं पाप कर्मो का बंध होना। Bandha (punya- papa)- Binding of karmas- meritorious & demeritorious
भद्रबाह- ये पाँचवे श्रुतकेवली थे। 12 वर्ष के दुर्भिक्ष के कारण इनको उज्जैनी छोड़कर दक्षिण की ओर प्रस्थान करना पड़ा था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य भी उस समय उनसे दीक्षा लेकर साथ ही दक्षिण देश को चले गये थे। श्रवण बेलगोल में चन्द्रगिरी पर्वत पर दोनों की समाधि हुयी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बध्यमान कर्म- मिथ्यात्वादि प्रत्ययों द्वारा कर्म रुप प्राप्त होने वाला कार्मण स्कंध बध्यमायन कहलाता है। Badhyamana Karma- A karmic aggregate bound with delusions
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर कायिक जीव- एकेन्द्रिय जीवों का एक भेद; जो स्वयं दूसरों से रुकता है तभा दूसरों को रोकता है। Badara Kayika Jiva- Gross-bodied beaings
इंद्रायुध Name of a king (in the era of whom Harivansh Puran was composed by Jinsenacharya). उत्तर भारत का एक राजा (ई.750-783 इनके समय में ही जिनसेनाचार्य ने हरिवंश पुरान की रचना की थी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]