दर्शन विनय!
दर्शन विनय Reverence to right faith. सम्यग्दर्शन के अंगों का पालन , भक्ति पूजा आदि गुणों को धारण तथा शंका आदि दोषों के त्याग को सम्यक्त्व विनय या दर्शन विनय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दर्शन विनय Reverence to right faith. सम्यग्दर्शन के अंगों का पालन , भक्ति पूजा आदि गुणों को धारण तथा शंका आदि दोषों के त्याग को सम्यक्त्व विनय या दर्शन विनय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद-विवाद – Vaad-Vivaada.: Debate,Mutual discussion,Argumentation. अपने पक्ष का प्रमाण से स्थापना करना वाद एवं दूसरे के मत को खंडन करने वाले वचन कहना विवाद है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोष – क्रोधी पुरूश का तीव्र परिणाम, कोप। Rosa-Anger, rage, Indignation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र (देव) – Shukra (Deva). An Indra of Shukra- Mahashukra heavens. शुक्र – महाशुक्र कल्प युगल का इन्द्र “
एकत्ववितर्क अवीचार The absolute supreme meditation. अर्थ व्यंजन और योग की संक्रान्ति को हटाकर मन को निश्चल करके 12 वें गुणस्थान को प्राप्त करना और फिर ध्यान लगाकर पीछे नहीं हटना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राग परिहार – परद्रव्यों के प्रति मोहभाव को छाडना, उदानसीता। Raga parihara- Avoidance of attachment, Non-attachment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचिक व्युत्सर्ग– Vaachika Vyutsarga.: See- Vaachanika Vyutsarga. देखें – वाचनिक व्युत्सर्ग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचाग्नि तप – Panchaagni Tapa. A type of austerity related to five types of fire. बालतप (मिथ्यातप); तापस 5 अग्नियों के मध्य बैठकर यह तप करते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सत्त्व – Prakrti Sattva. Attachment of karmas with soul. अपनी स्थिति के अनुसार कर्म प्रक्रति के कर्म प्रदेशों का आत्मा प्रदेशों के साथ संलग्न रहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचनिक – Vaachanika. Which can be expressed in words. वचनों के द्वारा किया जाने वाला या शब्दों में अभिव्यक्त “