सरस्वती स्तुति
सरस्वती स्तुति: लेखक—श्री ज्ञानभूषण मुनि विरचित द्रुतविलम्बित— छन्द: त्रिजगदीश जिनेन्द्र मुखोद्भवा, त्रिजगति—जन—जाति—हतंकारा। त्रिभुवनेशनुता हि सरस्वती, चिदुपलब्धिमियं वितनोतु में।।१।। जो तीन जगत् के नाथ जिनेन्द्र भगवान् के मुख से उत्पन्न हुई है, जो तीनों जगत् के जन समूह का हित करने वाली है तथा तीनों लोकों के इन्द्र जिसकी स्तुति करते हैं ऐसी यह सरस्वती...