उद्योत नामकर्म प्रकृति!
उद्योत नामकर्म प्रकृति A karmic nature causing effulgence (lustrous) body. जिसके निमित्त से शरीर में उद्योत होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उद्योत नामकर्म प्रकृति A karmic nature causing effulgence (lustrous) body. जिसके निमित्त से शरीर में उद्योत होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शरीर : == मांसास्थिकसंघाते, मूत्रपुरीषभूते नवच्छिद्रे। अशुचि परिस्रवति, शुभं शरीरे किमस्ति ? —समणसुत्त : ५२० मांस और हड्डी के मेल से निर्मित, मल—मूत्र से भरे, नौ छिद्रों के द्वारा अशुचि पदार्थ को बहाने वाले शरीर में क्या शुभ हो सकता है ?
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोक्षेत्र – Nokshetra. All 5 entities rather than ‘Sky’. आकाश द्रव्य के अतिरिक्त जीव, पुदगल, धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय तथा काल द्रव्य नोक्षेत्र कहलाते है “
थानक पंथी / थानकवासी A shvetambar Jain sect. श्वेताम्बर जैन पंथ, ये प्रतिमा को नहीं पूजते हैं, साधु वस्त्र एंव मुह पर पट्टी रखते हैं । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयवादी – Vinayavadi. Particular follower of the vinayvad (policy of humility). एकांतमती; विनयवादियों के ३२ भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोइन्द्रिय – Noindriya. Dravya Man – a structural form of Man according to Jaina philosophy. द्रव्य मन; जो अंगोपांग नामकर्म के उदय से मनोवर्गणा से बनता है, इसे ईषत् इन्द्रिय भी कहते है ” यह ह्रदय से बनता है, इसे ईषत् इन्द्रिय भी कहते है ” यह ह्रदय स्थान में अष्टदल कमल के आकार…
त्रैकाल्ययोगी The disciple of Golacharyaji. एक आचार्य (ई.920-930) जो गोलाचार्य (ई. 900-920) के शिष्य तथा अभयनंदि (ई.930-950) के गुरू थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रसार –Vajrasaar Name of the 69th chief disciple of Lord Rishabhadev. भगवान ऋषभदेव के 84 गणधारों में 69 वें गणधर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैरात्म्यवाद – Nairaatmyavaada. The Buddhist doctrine of the non-existence of any sprit, supreme or human. बौद्धों का शून्यवाद, इसके अनुसार जगत शून्यरूप है “
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]