उपकार्य-उपकारक संबंध!
उपकार्य-उपकारक संबंध Beneficial relation. बंध का एक भेद जिस पर उपकार हो वह उपकार्य और जो उपकार करे वह उपकारक।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपकार्य-उपकारक संबंध Beneficial relation. बंध का एक भेद जिस पर उपकार हो वह उपकार्य और जो उपकार करे वह उपकारक।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चैतन्य Conscious soul, Rationality, perception. चित्त रूप आत्मा , जीव , ज्ञान , संवेदन ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्जकषाय – Sarja Kashaaya. Bitter or pungent passions. सर्ज साल नाम के वृक्ष को कहते है। उसके कषैले रस के समान जीव की कषायरूप् परिणति को सर्जकषाय कहते है।
चारित्रवृद्ध Abundance in character and austerity. चारित्र- तप आदि की अधिकता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चारित्रपंडित Noble and learned person having good conduct. सामायिक छेदोपस्थापना आदि पांच प्रकार के चारित्र के धारक मुनि ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पृहा – Sprhaa. Longing, intention, desire.वांछा, इच्छा, कामना, अभिलाषा।
उपदेशसम्यक्त्वार्य A type of Aryas (noble persons) who get right faith by the preaching of saints. अनृद्धि प्राप्त आर्य जिन्हें तिरेसठ शलाका पुरूषों के पुराण (वृत्तान्त) के उपदेश से तत्वार्थ श्रद्धान उत्पन्न हुआ हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
छक्कमुवष्स Name of a treatise pertaining to mundane activities. गृहस्थ षट्कर्म विषयक एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष नाम कर्म प्रकृति – Sparssana Naama Karma Prakrti. Physique making karmic nature causing sense of touch in the body.उत्पन्न कर्म के उदय से शरीर मे ठंड, गरम आदि स्पर्ष का ज्ञान उत्पन्न होता है उसे स्पर्ष नाम कर्म प्रकृति कहते है। इसके स्निग्ध, रुक्ष, मृदु, कठोर, शीत, उष्ण, हल्का और भारी 8 भेद…