द्विज्ञानसिद्ध!
द्विज्ञानसिद्ध The soul who gets salvation by two types of super knowledges (in accordance with Bhutpragyapan Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो ज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्विज्ञानसिद्ध The soul who gets salvation by two types of super knowledges (in accordance with Bhutpragyapan Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो ज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्ख श्रोता–Muurkh Shrota. Stupid listener. See – Muudh Shrota. श्रोता केक प्रकार” देखे– मूढ़ श्रोता”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकेवल – Nokevala. Nine kinds of destructional volitions. क्षायिक भाव; केवलदर्शन, केवलज्ञान, क्षायिकदान, लाभ, भोग, उपभोग, वीर्य, क्षायिक सम्यक्त्व-चारित्र “
द्वादशंग Twelve parts of scriptural knowledge. श्रुत के 12 अंग ; द्रव्यश्रुत रूप की रचना गणधर करते हैं इसे ही जिनवाणी कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == राग-द्वेष : == रत्तो बंधदि कम्मं, मुंचदि जीवो विरागसंपन्नो। —समयसार : १५३ जीव रागयुक्त होकर कर्म बांधता है और विरक्त होकर कर्मों से मुक्त होता है। असुहो मोह–पदोसो, सुहो व असुहो हवदि रागो। —प्रवचनसार : २-८८ मोह और द्वेष अशुभ ही होते हैं। राग शुभ और अशुभ, दोनों…
आलेख्याकार Painting with realness. चित्रकारी-केवलज्ञान में चित्रपट के समान तीनों काल की वस्तुएं चित्र के समान (आलेख्याकार) साक्षात भाषित होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रश्रृन्खला – Vajrashrankhalaa Name of the female demigod of Lord Abhinandannath, Name of a super power. भगवान अभिनन्दंननाथ की शासन देवी ,एक विद्या “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैरन्तर्य – Nairantarya. Continuousness, Constancy. निरंतर होने का भाव, निबार्धता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक समुदघात –VaikriyikaSamudghata Overflowing of soul points from the body for transforming the own shape. विक्रिया करने के लिय अथार्त शरीर को छोटा, बड़ा या अन्य शरीर रूप करने के लिय आत्मा के प्रदेश शरीर से बाहर निकलते हैं वह वैक्रियिक समुदघात हैं “