पृथिवीपाल!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीपाल – Prthivipala. Name of the writer of ‘Shrut Panchami Rasa’, Name of a Pandit. पानीपत का निवासी था, वि. १६९२ में श्रुत पंचमी रास की रचना की, एक पंडित; व्रत कथाकोष छंद के कर्ता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीपाल – Prthivipala. Name of the writer of ‘Shrut Panchami Rasa’, Name of a Pandit. पानीपत का निवासी था, वि. १६९२ में श्रुत पंचमी रास की रचना की, एक पंडित; व्रत कथाकोष छंद के कर्ता “
दक्षिण कल्प Southern part of Patals (levels) of all 16 heavens. 16 स्वर्गोंे के पटलों का दक्षिणी भाग। जहाँ दक्षिण दिशा के इन्द्रों का निवास होता है। जैसे – सौधर्म इन्द्र, सानत्कुमार इन्द्र आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्विकल्पता – Nirvikalpataa. State of unconfusedness, without perplexity. विकल्पों से रहित रहना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवाननुगामी – Bhavananugami. A type of clairvoyance (not remains with one in next birth). अननुगामी अवधिज्ञान का एक भेद; जो भवान्तर के साथ नहीं जाता , क्षेत्रान्तर में ही साथ जाता है “
आलय विज्ञान Architecture (as a science), House construction concept. वास्तु विज्ञान आवास निवास विज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वाण संवत् – Nirvaana Samvat. The era of salvation of Lord. भगवन के निर्वाण का समय-कल अर्थात् वर्ष ” वर्तमान में भगवन महावीर के निर्वाण के समय से प्रारंभ ‘वीर निर्वाण संवत्’ सर्वाधिक प्राचीन संवत्के रूप में प्रचलित है ” वर्तमान सन् 2003-2004 में वी.नि.सं. 2530 चल रहा है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावस्तवन – Bhavastavana. Eulogical praising of Lord Jinendra. जिनेन्द्र भगवान के गुणों का स्मरण करना “
आरातीय Acharyas (Jaina – saints) of present tradition. वर्तमान परम्परा के आचार्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदारण क्रिया – Vidarana Kriya. Exposing others’ sinful activities. साम्परायिक आस्रव की १८ वीं क्रिया ” दुसरे ने जो सावध कार्य किया हो उसे प्रकाशित करना “