तीसरी भूमिका!
तीसरी भूमिका Modified state of soul. प्रतिक्रमण्रा आदि के विकल्पों से रहित शुद्धात्मा की भूमिका । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तीसरी भूमिका Modified state of soul. प्रतिक्रमण्रा आदि के विकल्पों से रहित शुद्धात्मा की भूमिका । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चर्याश्रावक Observance of a householder. अभ्यासी श्रावक का आचरण ; दर्शन प्रतिमा से अनुमति त्याग प्रतिमा तक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधिमरण – Samaadhimarana. The holy death of saints. सल्लेखना, इसमें शरीर मे ममत्व छोड़कर देह का विसर्जन किया जाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभोपयोगी – Shubhopayogee. One involved in auspicious conduct. जो देशचारित्र अथवा सकलचारित्र का पालन करते हुए धर्म क्रियाओं में लीं रहते हैं, वे शुभोपयोगी श्रावक या मुनि कहलाते हैं “
चित्रगृह A special part of the residence of some deities. भवन्वासी देवों के भवनों में एक गृह ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समवसरण व्रत – Samavasarana Vrata. A type of vow (fasting) to be observed for different 24 days in regard to the different auspicious objects of Samavasaran (the holy assembly of Lord Arihant). तीर्थकर के समवसरण मे मानस्तंभ, आठ भूमियंा, तीन कटनी, अतिशय, प्रातिहार्य, अनंतचतुष्टय तथा मुनि, आर्यिका, देव, देवी, मनुष्य एंव तियैच आदि द्वारा…
तीर्थयात्रा Pilgrimage-a journey made by a pilgrim. श्रावक का कर्तव्य, संयम के साथ तीर्थों की वंदना करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संचया – Sanchayaa. Name of a main city of Mangalavati region of eastern Videh (region). पूर्व विदेह्स्थ मंगलावती क्षेत्र की मुख्य नगरी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बोधि – Bodhi. Gain of perfect knowledge or wisdom (reg. right faith, knowledge and conduct). सम्यग्दर्शन , ज्ञान , चारित्र , की प्राप्ति होना बोधि है “