घोषसम!
घोषसम Resonance (regarding scriptural knowledge ‘Shrutgyan’). अनुयोग श्रुतज्ञान ; जो घोष अर्थात त् द्रव्यानुयोग द्वारा के साथ उतोपन्न होता है इस कारण घोषसम कहलाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
घोषसम Resonance (regarding scriptural knowledge ‘Shrutgyan’). अनुयोग श्रुतज्ञान ; जो घोष अर्थात त् द्रव्यानुयोग द्वारा के साथ उतोपन्न होता है इस कारण घोषसम कहलाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसारी – Sansaaree. Wordly beings. आठों कर्मों से लिप्त जीव अर्थात् जिन्होंने स्वभाव को प्राप्त नही किया है “
गृहीतग्रहण Acquired knowledge. ईहाज्ञान ; अवग्रह से ग्रहण किए पदार्थ को विशेष जानने की ओर उन्मुखता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदृश – Sadrsha. Similar, The same, One of the 88 planets. समान, एक जाति के, 88 ग्रहों में 32 वां ग्रह “
घोर गुण Those (super saints) having supreme virtues. उत्कृष्ट पराक्रम सहित हैं गुण जिनके , घोर गुण (ऋद्धिधारी मुनि) कहे जाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मघवा – Maghava.: Name of the 6th earth of hell. नरक की छठी पृथ्वी, जिसका अपरनाम तमःप्रभा है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाभांतराय – जिस कर्म के उदय से जीव किसी वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा करता हुआ भी प्राप्त नही कर पाता। Labhamtaraya-Obstruction in getting desirable attainment
गुरुत्वगति Gravitational motion. गति का एक भेद ; पत्थर आदि के नीचे की ओर जाने वाली गति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्तविध संसार – Saptvidha Sansaara. Seven modes of involvement of beings in the wordly cycle. एकेन्द्रिय जीव के सूक्ष्म बादर, द्वीन्द्रिय, श्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, पंचेन्द्रिय के संज्ञी और असंज्ञी ये संसारी जीव के सात भेद है, इनमें भ्रमण करना ही सात प्रकार का संसार है।
उद्देश A subdivision of chapter, Enunciation. निर्देश: विवेचनीय वस्तु के केवल नामोल्लेख करने को उद्देश कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]