बंधस्वामित्व!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधस्वामित्व- कर्म सिद्धान्त विषयक एक ग्रंथ। Bandhasvamitva- Name of a book
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधस्वामित्व- कर्म सिद्धान्त विषयक एक ग्रंथ। Bandhasvamitva- Name of a book
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसिद्धि – Sansiddhi. Completion of any work. किसी कार्य का निष्पन्न या पूर्ण होना ” सिद्ध, साधित, आराधित और संसिद्धि शब्द एकार्थवाची हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकर दोष – Sankara Dosa. Hybridisation- a fault. किसी धान्य, फल, पुष्प अथवा जाति में दो भिन्न-भिन्न प्रकार की वस्तु या जाति के सम्मिश्रण से संकर दोष होता है ” जैसे दो प्रकार की गुलाब की कलम का मिश्रण कर लगाने से तीसरे रंग का पैदा हुआ गुलाब संकर कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षण्णवति प्रकरण – Sannavati Prakarana. Name of a book written by Acharya Somsen. आचार्य सोमसेन (ई. 943-968) कृत न्याय विषयक एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधपरिणाम- जीव के बंध योग्य कषाय आदि परिणाम। Bandhaparinama- passions etc. – causes of binding of karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लवणसागर – मध्यलोक का प्रथम सागर खारे जल वाला होने से इसका नाम लवणोदधि है। Lavanasagara- The first ocean of middle universe, containing salty water
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्पर्याप्ति – Satparyaapti. Six kinds of basic devlopment of beings. आहार, शरीर,इन्द्रिय,स्वासोच्छ्वास, भाषा और मनः प्रयाप्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसंवेग संम्पन्नता – तीर्थकर कर्मबंध का छठा कारण रत्नत्रय जनित हर्श का नाम लब्धिसंवेग है। Labdhisamvega Sampannata-A kind of super enjoyment pertaining to Tirthankar (Jaina-Lord)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवदल कर्म – Sanbhavadala Karma. Cutting of wood. लकड़ी के आवश्यकतानुसार भाग कर दिये जाना संभवदल कर्म है “