रक्षा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षा – देखभाल, सुरक्षा अहिंसा, मन वचन काय की क्रिया देखभाल कर, करना जिससे जीव घात न हो, पिषाच व्यंतरो का दूसरा भेद। Raksa-To protect all living beings, defence, non-violence, A type of peripatetic deity (Pishach)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षा – देखभाल, सुरक्षा अहिंसा, मन वचन काय की क्रिया देखभाल कर, करना जिससे जीव घात न हो, पिषाच व्यंतरो का दूसरा भेद। Raksa-To protect all living beings, defence, non-violence, A type of peripatetic deity (Pishach)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरदेव- Suradeva. Name of the 2nd predestined Tirthankar (Jaina-Lord). भावीकालीन दूसरे तीर्थकर ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नवृष्टि – रत्नवर्शा तीर्थकरों के गर्भावस्था में आने के 6 महीने पहले से जन्म पर्यन्त 15 मास तक जो कुबेर माता के आंगन मे रत्नो की वर्शा करते है। Ratnavrsti-Divinely rain of jewels (an auspicious event pertaining to the birth of Jaina lord)
चतुर्भुज समलम्ब Trapezium. चार भुजाओं वाला चित्र जिसमें आमने-सामने की कोई दो भुजाएं समान्तर होती हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्याभाव संबंध – Bhavisyabhava Sambamdha. A type of relation pertaining to future. संबंध के अनेक भेड़ों में एक भेद “
चतुर्विधामर Four types of deities. ४ निकाय के देव -भवनवासी ,व्यंतर ,ज्योतिष्क ,वैमानिक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समपाद तप – Sampaada Tapa. A type of physical mortification standing on feet keeping them straight. कायक्लेश तप का एक भेद। जिसमे दोनो पैर समान रखे जाये।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगसार – आचार्य यागेन्दु देव द्वारा रचित 108 दोहा प्रमाण अपभ्रंष अध्यात्मिक ग्रंथ। Yogasara-Name of the treatise