श्रावस्ती ( तीर्थ )!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावस्ती ( तीर्थ ) – Shraavastee (Teerth). Name of a place of pilgrimage, the birth place of Lord Sambhavanath, near Baharaich (U.P). उत्तरप्रदेश में बहराईच के निकट स्थित तीर्थंकर सम्भवनाथ की जन्मनगरी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावस्ती ( तीर्थ ) – Shraavastee (Teerth). Name of a place of pilgrimage, the birth place of Lord Sambhavanath, near Baharaich (U.P). उत्तरप्रदेश में बहराईच के निकट स्थित तीर्थंकर सम्भवनाथ की जन्मनगरी “
चातुर्दीपिक भूगोल The name of an ancient composition of geography. एक भूगोल जो रायकृष्णदास जी के लेख के अनुसार वैदिक धर्मं में मान्य सप्तद्वीपिक भूगोल से अधिक प्राचीन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संप्रदाय विरोध – Sampradaaya Virodha. Castewise mutual contradiction. भिन्न-भिन्न जातियों में पारस्परिक विरोध “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मैथुन : == कम्प: स्वेद: श्रमो मूच्र्छा, भ्रमिग्र्लानिर्मलक्षय:। राजयक्ष्मादिरोगाश्च, भवेयुर्मैथुनोत्थिता:।। —योगशास्त्र : २-७८ मैथुन से कंपकंपी, स्वेद—पसीना, श्रम—थकावट, मूर्छा—मोह, भ्रमि—चक्कर आना, ग्लानि—अंगों का टूटना, शक्ति का विनाश, राज्यक्ष्मा—क्षय रोग तथा अन्य खांसी, श्वास आदि रोगों की उत्पत्ति होती है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञोपवीत–Yagyopavit. Sacred thread (used for sanctifying or purificatory rites). एक संस्कार; चक्रवर्ती भरत ने 11 प्रतिमाओ के विभाग से वृतो के चिन्ह स्वरुप एक से लेकर 11 तार के सूत्र व्रतियो को दिये थे, जनेऊ; रत्नत्रय एवं सात परम स्थानो का सूतक 3 व 7 तारो का सूत्र” सभी पूजन–दान आदि क्रियाओ में…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धान – Shraddhaana. Reverential belief, Veneration. प्रतिती, श्रद्धा, अनुभव “
दुष्टनिग्रह To punish the corrupted, wicked or vicious persons. दुष्टों को दंड देना(राजा या क्षत्रिय का एक कत्र्तव्य)। [[श्रेणी:शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवेश द्वार- भीतर जाने का मुख्य दरवाजा। Pravesa Dvara- Approach door, Vestibule
देव God, Deity, Celestials. देव शब्द का प्रयोग अर्हंत व सिद्ध भगवन्तों के लिए तथा देवगति में जन्म लेने वाले संसारी जीवों के लिए होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]] या Name of an Acharya possessing knowledge of 11 Angas and 10 Purvas. भद्रबाहु प्रथम (श्रुतकेवली) के पश्चात् दसवें आचार्य जो 11 अंग व 10 पुर्व…