स्ववात्सल्य!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्ववात्सल्य – Svavaatsalya. Self affection. वात्सल्य के दो भेदो मे एक भेद। स्वद्रव्य मे रति अर्थात् अपनी आत्मा से सम्बन्ध रखने वालाक वात्सल्य प्रधान है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्ववात्सल्य – Svavaatsalya. Self affection. वात्सल्य के दो भेदो मे एक भेद। स्वद्रव्य मे रति अर्थात् अपनी आत्मा से सम्बन्ध रखने वालाक वात्सल्य प्रधान है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा परिच्छेद – Bhasha Pariccheda. Name of a book written by Vishvanath. विश्वनाथ कृत वैशेषिक दर्शन का एक ग्रंथ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावन लोक – Bhavana Loka. Place of residence of deities. जहां असुरकुमार आदि भवनवासी देवों के भवन हैं अर्थात् खरभाग- पंकभाग “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्गवासी देव – Svargavaasii Deva. Heavenly deities. कल्पवासी देव-वैमानिक देव अर्थात् 16 स्वर्ग, 9 गै्रवेयक, 9 अनुदिष, 5 अनुत्तर के निवासी देव।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लांगलचित्र – परिणाम संख्या की हल के आकार की रचना लांगल चित्र कहते है। Lamgal Citra-a plough like figure
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संधि – Sandhi. Alliance, union, Reconcillation, A treaty, Name of a planet, Joint of the body. संयोग, आपस का मेल, एक राजा का दुसरे राजा के साथ विशिष्ट शर्तों पर मैत्री भाव स्थापित करना, 88 ग्रहों में 33वां ग्रह (अपरनाम शांति), औदारिक शरीर में 300 संधि हैं “
एकोनविंशति A number, 19. 19- देशावधि की क्रमिक वृद्धि के 19 काण्डक।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यगति प्रायोग्यानुपूर्वी – Manushyagati Praayogyaanupuurvi. Transmigratory state of soul as in previous shape while going towards human birth. जिस कर्म के उदय से मनुष्य गति में जाते हुए जीव के पूर्व शरीर के समान आत्मा के प्रदेशों का आकार बना रहे “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्षसम्मोह– Yakshasammoh. A kind of peripatetic deities. पिशाच व्यंतरोका एक प्रकार”
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंभू छंद – Svatannbgyy Chammda. Name of an apbransh poetics written by poet Svayambhu. कवि स्वंयभू ई0 734-840 कृत 8 अघ्यायो वाला अपभं्रश छंद शास्त्र।