युगलविरोधी धर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगलविरोधी धर्म – सत्ता – असत्ता, एकत्व – अनेकत्व, भव्य – अभव्य, मूर्त – अमूर्त आदि वस्तुओ के परस्पर विरोधी धर्म Yugalavirodhi Dharma-Mutual opposite characteristics
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगलविरोधी धर्म – सत्ता – असत्ता, एकत्व – अनेकत्व, भव्य – अभव्य, मूर्त – अमूर्त आदि वस्तुओ के परस्पर विरोधी धर्म Yugalavirodhi Dharma-Mutual opposite characteristics
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषदत्ता – Purusadatta. Ruling female demigod of Lord Sumatinath. भगवान सुमतिनाथ की शासन देवी (यक्षिणी) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यागमण्डल – पंच कल्याणक प्रतिश्ठा में किया जाने वाला एक विषेश पूजा विधान, इसमें प्रतिश्ठा में भाग लेने हेतू अनेक देवी देवताओ का आहवान करके उन्हें यज्ञभाग समर्पित किया जाता है।गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा संस्कृत यागमंडल के आधार से रचित हिन्दी पूजा ग्रंथ। Yagamandala-A special kind of worshipping to be observed in…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रणाली – Pranaalee. Particular method, System, Water channel, Drain. पद्धति, जलमार्ग, नाली
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नसंचया – विदेह क्षएत्र की 32 नगरियो मे 16 नगरी Ratnasancaya- Name of the 16th city situated in Videh Kshetra (region)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचाला – Prachalaa. Drowsiness (Karmic nature causing drowsiness). दर्शनावरण कर्म का एक भेद; जिसके उदय से प्राणी नींद में भी कुछ जागता है और कुछ सोता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगपत – एक साथ जैसे केवल ज्ञान होने के बाद अनन्त ज्ञान व अनन्त दर्षन एक साथ ही होता है। Yugapata-Unitedly, Combinedly
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तादाम–Muktadaam. A type of wreath of pearls. मोतियो से निर्मित मालाये, इन्हें विमानों में लटकाकर उनकी शोबव्रद्धि की जाति है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नकंबल – रत्नों से बना एक कंबल। उज्जैन की सेठानी यषोभद्रा ने अपने पु़त्र सुकुमाल की पत्नियों के लिए रत्नकंबल खरीदा और पुत्र वधुओं के लिए उसकी जूतिया बनवायी। देंखें – सुकुमाल चरित्र Ratnakambala-Blanket of jewels
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:सूक्तियां ]] [[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मनुष्य : == मण्णंति जदा णिच्चं मणेण णिउणा जदो दु ये जीवा। मण उक्कडा य जम्हा तम्हा ते माणुसा भणिया।। —पंचसंग्रह : १-६२ वे मनुष्य कहलाते हैं जो मन के द्वारा नित्य ही हेय—उपादेय, तत्त्व—अतत्त्व तथा धर्म—अधर्म का विचार करते हैं, कार्य…