ईर्यापथिक!
ईर्यापथिक A type of repentance (Pratikraman). 7 प्रकार के प्रतिक्रमणों में एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ईर्यापथिक A type of repentance (Pratikraman). 7 प्रकार के प्रतिक्रमणों में एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिपत्तिसमास – pratipattisamaasa. A type of scriptual knowledge (Shrutgyan). श्रुताज्ञान के 20 भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिक्षण विनाशीभाव – Pratikshana Vinaasheebhaava. Perishing momentarily (reg. Paryay). पर्याय, जो प्रतिक्षण नष्ट होती रहती है “
उदयचन्द्र Name of an Acharya of Nandi group, Name of a poet. नन्दी]संघ (देशीयगण) की नयकीर्ति शाखा के एक गुरू अपभ्रंश कवि इनकी प्रधान कृति सुअंधदहमीकहा है (समय ई. सन् ११५० ११९६) ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पसेन – Puspasena. Name of a Digambar Acharya, the preceptor of Vadeebh Singh, Name of a poet. एक दिगम्बर आचार्य (ई. ७२०-७८०) एवं छत्रचूड़ामणि के कर्ता वादीभ सिंह के गुरु, कवि; द्विसंधान, सप्तसंधान काव्य टीका के कर्ता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार रूचि –VistaraRuchi. Those having interest of thorough study. शिष्यों के तीन भेदों, में एक भेद, विस्तार से समझने की रूचि रखने वाले शिष्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पगंधी – Puspagamdhi. Name of the chief female divinity of peripatetic Indra Atikay. महोरग जाति के व्यंतरो के इन्द्र अतिकाय की वल्लभिका देवी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषार्थसिध्दयुपाय – Purusarthasiddhayupaya. A book written by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र (ई. ९०५-९५५) द्वारा रचित एक श्रावकाचार एवं अहिंसा की विशेष व्याख्या करने वाला संस्कृत ग्रंथ, यह श्रावक एवं साधुओं द्वारा अवश्य पठनीय है “
द्विचरमावली A time period (last 2 Avali). अंतिम दो आवली। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]