नेमिप्रभु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिप्रभु – Nemiprabhu. Name of the 16th Tirthankar (jaina laord) situated in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र विद्यमान 20 तीर्थंकरों में 16 वें तीर्थंकर का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिप्रभु – Nemiprabhu. Name of the 16th Tirthankar (jaina laord) situated in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र विद्यमान 20 तीर्थंकरों में 16 वें तीर्थंकर का नाम “
तीर्थंकर नामकर्म प्रकृति Auspicious Karmic nature causing the state of Tirthankar (Jaina -Lord). नामकर्म की एक पुण्य प्रकृति, इसका बंध सोलहकारण भावना भाने से होता है। ऐसे परिणाम केवल मनुष्य भव में और वहाँ भी किसी तीर्थंकर अथवा केवली के पादमूल में ही होने संभव है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीर्ष प्रहेलिका – Sheersha Prahelikaa. A type of time unit. काल का एक प्रमाण; लता, प्रयुत, महाऊह या शीर्षप्रहेलिका “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नील लेश्या – Neela Leshyaa. Blue thought colouration or aura (related to worldly Passions). अशुभ भाव जो तीव्र कषय से हो; अतिलोभ, चपलता, अनृत भाषण, माया, तृष्णा, परवंचना, आलस्य, मूर्खता आदि नील लेश्या के लक्षण है “
द्रव्य सम्यग्दृष्टि One having keen desire & eligible talent for getting right perception. जो जीव अपने कल्याण का इच्छुक है अर्थात् जिसमें आगामी काल में सम्यक्त्व होने की योग्यता है। यह द्रव्य निक्षेप की अपेक्षा कथन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भानुनंदी – Bhanunamdi. Name of the disciple of Nemichandra-1 & preceptor of Sinhnandi-1. नेमिचन्द नं. १ के शिष्य और सिंहनन्दी नं. १ के गुरु (ई. ५६५-५८६) का नाम “
शिल्पकर्म – Shipakarma. Handicraft, Architecture, Having to do with craft. भगवान ऋषभदेव द्वारा बताये गए षट कर्मों में एक; हस्त कौशल से जीविकोपार्जन करना “