देवद्विक!
देवद्विक Dyad of Karmic nature related to celestial destination. देवगति व आनुपूर्वी (देवगत्यानुपूर्वी)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवद्विक Dyad of Karmic nature related to celestial destination. देवगति व आनुपूर्वी (देवगत्यानुपूर्वी)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार सम्यग्दर्शन –VistaraSamyagdarsana. Right faith after thorough learning of scriptures. सम्यकत्व के १० भेदों में सातवा भेद, जीव आदि तत्त्वों को विस्तार रूप, से सुनकर जो श्रध्दान हो वह विस्तार सम्यग्दर्शन है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव द्रव्य व्यंजन पर्याय – Svabhaava Dravya Vyamjana Paryaaya. Natural state of soul points in the salvated form. बिना दूसरे के निमित से जो व्यंजन पर्याय होती है वह स्वभाव द्रव्य व्यंजन पर्याय है। जीव का सिद्वपने का आकार या जीव की सिद्वपर्याय।
दृष्टिशक्ति Power of vision. दर्शन क्रियारूप शक्ति जिसमें ज्ञेयरूप आकार का विशेष नहीं हैं ऐसे दर्शनोपयोगमयी (सत्तामात्र पदार्थ से उपयुक्त होने स्वरूप ) है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वभाव अनित्य नय – Svabhaava Anitya Naya. A standpoint related to non-eternity in pure nature.सत्तगौण उत्पादध्ययग्राहक स्वभाव अनित्य शुद्व पर्या
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वपर चतुष्टय – Svapara Catustaya. Quartel of the properties of matter (in relation to Dravya, Kshetra, Kal, Bhav) related to self & others.द्रव्य का अपना द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव स्वचतुष्टय एवं इतर द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव परचतुष्टय कहलाता है। इसकी अपेक्षा ही वस्तु मे अस्तिनास्ति, भेदाभेदपना पाया जाता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भदेय – Bhadeya. Name of a mountain of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरतक्षेत्र आर्य खण्ड का एक पर्वत “