त्रैकाल्ययोगी!
त्रैकाल्ययोगी The disciple of Golacharyaji. एक आचार्य (ई.920-930) जो गोलाचार्य (ई. 900-920) के शिष्य तथा अभयनंदि (ई.930-950) के गुरू थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रैकाल्ययोगी The disciple of Golacharyaji. एक आचार्य (ई.920-930) जो गोलाचार्य (ई. 900-920) के शिष्य तथा अभयनंदि (ई.930-950) के गुरू थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गुप्तिगुप्त Another name of Acharya Arhadvali. श्रुतावतार में कथित आचार्य अर्हद्वली का अपरनाम . समय-ई.३८-४८ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गोवर्द्धन The 4th omniscient after Lord Mahavira. भगवान वीर के के पश्चात् हुए चौथे श्रुतकेवली ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंदिर निर्माण कर्म – Mandira Nirmana Karma. A duty of householders to construct the temples. श्रावकों का एक कर्म ; मंदिर का निर्माण कर पंचकल्याणक आदि विधि से जिनेन्द्रप्रभु को विराजमान करना “
चतुर्दश गुणस्थान Fourteen Gunsthan-stages of spiritual developments. १४ गुणस्थान ; मिथ्यात्व , सासादन , मिश्र , अविरत सम्यग्दृष्टि , देशाविरत , प्रमत्त , अप्रमत्त, अपूर्वकरण , अनुवृत्तिकरण, सूक्ष्म-साम्पराय , उपशांत मोह , क्षीणमोह , संयोगकेवली, आयोगकेवली ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वितथ –Vitatha.: Untrue,False,Meaningless. असत्य,मिथ्या,निरर्थक “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंत्र महोदधि : Name of a book related to mystical knowledge (sorcery). मंत्र तंत्र विषयक एक किताब “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयसेन – Vijayasena.: Name of an Acharya possessing knowledge of 11 Angas & 10 Purvas (part of scriptural knowledge). भद्रबाहु श्रुतकेवली के पश्चात् हुए 8 वें 11 अंग व 10 पूर्वधारी आचार्य “समय –वि.नि. 282 -295 “