तिक्त रस!
तिक्त रस Pungent flavour, bitter in taste. कडुवा रस या स्वाद। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तिक्त रस Pungent flavour, bitter in taste. कडुवा रस या स्वाद। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलदेव- बलभद्र; नारायण के बड़े भई, ये संख्या में 9 होते हैं एवं स्वर्ग या मोक्ष जाते है। Baladeva- A type of great personages
उपशमसम्यग्दृष्टि One who acquires right faith due to upasham. उपशम सम्यक्त्व को प्राप्त करने वाला।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बन्ध (पुण्य-पाप)- पुण्य एवं पाप कर्मो का बंध होना। Bandha (punya- papa)- Binding of karmas- meritorious & demeritorious
भद्रबाह- ये पाँचवे श्रुतकेवली थे। 12 वर्ष के दुर्भिक्ष के कारण इनको उज्जैनी छोड़कर दक्षिण की ओर प्रस्थान करना पड़ा था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य भी उस समय उनसे दीक्षा लेकर साथ ही दक्षिण देश को चले गये थे। श्रवण बेलगोल में चन्द्रगिरी पर्वत पर दोनों की समाधि हुयी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तपाचार Observance of austerity. बारह प्रकार के तपों का आसचरण करना अनशन अवमौदर्य , रसपरित्याग, वृत्ति- परिसंख्यान, कायक्लेश और विविक्तशरूयायन ये 6 बाह्य तप है एवं प्रायश्चित्त , विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, ध्यान और व्युत्सर्ग ये 6 अंतरंग तप हैं।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बध्यमान कर्म- मिथ्यात्वादि प्रत्ययों द्वारा कर्म रुप प्राप्त होने वाला कार्मण स्कंध बध्यमायन कहलाता है। Badhyamana Karma- A karmic aggregate bound with delusions