उत्तरध्ययन!
उत्तरध्ययन A type scriptural knowledge (Shrutgyan). अंगबाह्य श्रुतज्ञान का एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उत्तरध्ययन A type scriptural knowledge (Shrutgyan). अंगबाह्य श्रुतज्ञान का एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चैतन्यप्राणरक्षा Absolute non-violence; protection of consciousness with the lack of passionate thoughts. निश्र्चय अहिंसा; रागादि का अभाव क्योंकि यह शुद्ध चैतन्य प्राण की रक्षा का कारण है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चारित्र औपशमिक Conduct causing lack of passions, lusts, desires etc. चारित्रमोहनीय के उपशम से जो वीतराग भावरूप चारित्र हो ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समानता – Samaanataa. Similarity, Parity. एकरुपता। ऋजुसूत्र नय की दृष्टि मे कोई के समान नही है, क्योंकि देा को सर्वथा समान मान लेने पर, उन दोनो मे एकत्व की आपत्ति प्राप्त होती है।
घ्नत A process of multiplication, Killed-one. गुणित, अभ्यस्त , घ्नत, हत सब एकार्थवाची हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्तव -Stava. Hymning or praising (of 24 Tirthankaras, Jaina-Lords).24 तीर्थकरो के गुणो का कीर्तन करना स्तव कहलाता है। इसे स्तवन या स्तुति भी कहते है।
चालन A divine medicine. एक दिव्या औषधि ; इससे बंधे हुए कोटाकोटी स्थिति बंध वाले कर्मा चालिसिय कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समवायांग – Samavaayaanga. The 4th part in all 12 parts of Shrut (early canons). द्वादषंग श्रुत का चैथा अंगः इसमे द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव की अपेक्षा समानता का कथन है अर्थात् जिसमे पदार्थों की समानता के आघार पर समवाय का विचार किया गया है वह समवायांग है। इसमें एक लाख 64 हजार पद है।
चलप्रदेश Some of the space points of soul . जीव के ८ मध्यप्रदेशों को छोड़कर बाक़ी के प्रदेश ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संचार – Sanchaara. Movement, Transmission. घूमना, एक अक्ष या भंग को अनेक भंगों में क्रम से पलटना “