संघात समास ज्ञान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघात समास ज्ञान –Sanghaata Samaasa Gyana. The 8th division of Shrutgyan (scriptural knowledge) among all 20 divisions. श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 8 वां भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघात समास ज्ञान –Sanghaata Samaasa Gyana. The 8th division of Shrutgyan (scriptural knowledge) among all 20 divisions. श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 8 वां भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रस निरपक्ष आहार – नीरस आहार, रसयुक्त अर्थात स्वादिश्ट भोजन आदि की अभिलाशा न करना। Rasa Nirapeksa (Ahara)-Devoid of the desire of tasty food
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धात्म दर्शन – Shuddhaatma Darshana. Right faith (in supreme being), A synonym word for Mokshmarg (path of salvation). देखें – शुद्धात्म ज्ञान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सद्वर्माविसंवाद – Saddharmaavisamvaada. Not keeping harmony with fellow borthers. साधर्मी भाइयो से लड़ाई झगड़ाः ऐसा नही करना अचैर्य व्रत की 5 भावनाओं मे अंतिम भावना हेै।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोनंदी – नन्दीसंघ बलात्कर गण में यष कीर्ति ई 231 – 299 के षिश्य व देवनंदी के गुरू ई 289 – 336। Yasonamdi-Name of an Acharya of nandi Group
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विघ्न- Vighna.: Obstruction,hinderance,obstacle. अन्तराय; किसी भी कार्य में बाधा आना “
देववंदना Trikal (three times a day) Samayik (act of procedural adoration to Lord Arihant). त्रैकालिक सामायिक में विधिपूर्वक चैत्य व पंचगुरूभक्ति सहित वंदना करने को देववंदना कहते हैं । श्री वसुनंदि आचार्य की मुलाचार टीका के अनुसार , ‘‘सामाइय’’ नाम भवति। जीवितमरणलाभसंयोगविप्रयोग बन्ध्वरिसुखदुःखादिषु यदेतत्समत्वं समानपरिणामः त्रिकालदेववंदनाकरणं च तत्सामायिकं व्रतं भवति।’’ अर्थात् ‘‘ जीवन-मरण, लाभ –…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकृत गति – Vikarta Gati.: Unnatural or Uncommon form. विभाव गति ;जीवों में विकृतगति प्रयोग से या कर्मों के प्रतिघात से होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूति – अभिरूचि, प्रेम, तत्वार्थ के विशय में तन्मयपना। Ruci-Interest, devotion, spiritual, Attachment