स्त्रीवेद कर्म प्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्रीवेद कर्म प्रकृति – Striveda Karma Prakrti Karmic nature causing sexual desire in woman.देखे- स्त्रीवेद। नो कषाय का एक भेद जिसके उदय से पुरुष से संयोग की याह हो।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्रीवेद कर्म प्रकृति – Striveda Karma Prakrti Karmic nature causing sexual desire in woman.देखे- स्त्रीवेद। नो कषाय का एक भेद जिसके उदय से पुरुष से संयोग की याह हो।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लांतव देव – सातवे स्वर्ग के निवासी देव। Lamtava Deva-The deities of the 7th heaven
चतुर्दश राजू Fourteen Raju, measure of the universe. १४ राजू , लोक का प्रमाण ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्री परिषह जय – Stri Parisaha Jaya. Victory over the woman-affliction causing sexual troubles.एकांत उद्यान या भवन आदि स्थानो मे यौवन से उन्मत्त स्त्रियो के द्वारा बाधा पहुुंचाये जाने पर भी कामविहार से विचलित नही होना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संचेतन – Sanchetana. Consciousness. किसी के प्रति एकाग्र होकर ही अनुभवरूप स्वाद लेना उसका संचेतन कहलाता हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] Svabhaava Kriyaa. Natural activities (of all matters). ग्तिरुप ंिक्रया के 10 भेदो मे एक भेद। जीवो की स्वभाव क्रिया सिद्वि गमन और पुद्गलो की स्वभाव क्रिया परमाणु की गति है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगपरिकर्म – मन वचन काय द्वारा आत्म प्रदेषो की चंचलता। Yoga parikarma-Vibration in soul points
चार्वाक Speaking agreeably, The name of a materialistic philosophy. सर्वजनप्रिय होने की संज्ञा , नास्तिक मत को मानने वाला एकांत दर्शन।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शूर – Shoora. One conqueror of all passions & afflictions, Name of a country of Bharat Kshetra Arya Khand (region), The grand father of Lord Neminath. परिषहों, कषायों और काम, मोह आदि के विजेता शूर कहलाते हैं, भारतक्षेत्र आर्यखण्ड का देश, भगवान नेमिनाथ के बाबा “
चित्रलाचरण Variegated (unstable) conduct (having different types of nature). मन को जो प्रमादस्वरुप करे वह चित्तल एवं ऐसे चित्तल आचरण वाला चित्रलाचरण होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]