मुनिदत्त!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिदत्त–Munidatt,
जयपाल Name of an Acharya possessing knowledge of 11 Angas (scriptural knowledge). ११ अंगधारी पांच मुनियों में दूसरे मुनि (वी. नि. ३६३-३८३)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्वापसरण – Satvaapasarana. Regression of Karmic nature. कर्म प्रकृतियों का सत्ता में घटना या अपसरण होना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्त जीवराशि –Mukta Jeevrashi. An infinite number of salvated beings. अनंतानंत, द्रव्य गणना कीअपेक्षा जिसकी सहनानी ‘3’ है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयंधर – Vinayandhara. Name of a great Acharya possessing some knowledge of Anga & Purva (part of scriptural knowledge). लोहाचार्य के बाद हुए अंग और पुर्वों के एक देश के ज्ञाता ४ मुनियों में प्रथम मुनि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्व-उपकार – Sra – Upakaara. Benefitting self (reg. soul).आत्महित।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैरात्रिक –Vairatrika A particular time period after midnight. पिछली रात्रि, अपररात्रि, आधी रात के बाद दो घड़ी बीत जाने पर वहाँ से लेकर दो घड़ी रात रहे तब तक के काल को वैरात्रिक कहते हैं ” साधू जन कृतिकर्मपूर्वक वैरात्रिक स्वाध्याय करते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोरमा- Manoramaa. Something attractive or beautiful, Name of the daughters of king Pawanveg and Chakravarti Abhayaghosh. विजयार्ध पर्वत पर मेघपुर नगर के राजा पवनवेग की पुत्री , चक्रवर्ती अभयघोष की पुत्री का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादेकत्व – Syaadekatva. Oneness in nature (in some aspect).द्रव्य के सामान्य 11 स्वभावो मे एक स्वभाव। सम्पूर्ण स्वभावो का एक आधार होने से कथंचित् एक स्वभाव होना।