प्रकृति सप्रतिपक्षी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सप्रतिपक्षी – Prakrti Sapratipaksi. Karmic natures having mutual contradictions. ६२ कर्म प्रक्रतियां आपस में विरोधिपना होने से सप्रतिपक्षी कही जाती हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सप्रतिपक्षी – Prakrti Sapratipaksi. Karmic natures having mutual contradictions. ६२ कर्म प्रक्रतियां आपस में विरोधिपना होने से सप्रतिपक्षी कही जाती हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तादाम–Muktadaam. A type of wreath of pearls. मोतियो से निर्मित मालाये, इन्हें विमानों में लटकाकर उनकी शोबव्रद्धि की जाति है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुरब्बा–Murabba. Jam; preserved fruit (not edible according to Jain philosophy). संधान(आचा आदि) जो त्रस जीवो से संसिक्त होने से अभक्ष्य अर्थात खाने योग्य नहीं है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:सूक्तियां ]] [[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मनुष्य : == मण्णंति जदा णिच्चं मणेण णिउणा जदो दु ये जीवा। मण उक्कडा य जम्हा तम्हा ते माणुसा भणिया।। —पंचसंग्रह : १-६२ वे मनुष्य कहलाते हैं जो मन के द्वारा नित्य ही हेय—उपादेय, तत्त्व—अतत्त्व तथा धर्म—अधर्म का विचार करते हैं, कार्य…
द्विचारित्रसिद्ध The soul who gets salvation through two types of super conducts (in accordance with Bhutpragyapana Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो चारित्र से सिद्ध होने वाले जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यसिद्ध – Manushyasiddha. Those salvated from human destinity. मनुष्य गति से सिद्ध होने वाले जीव अल्पबहुत्व की अपेक्षा ये संख्यात गुणे है “
द्वात्रिंशतिका Name of a prayer written by Amitgati Acharya. आचार्य अमितगति द्वारा रचित 32 श्लोक वाला सामायिक पाठ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यंजन निमित्तज्ञान –Vyainjana Nimittajnana. A science of omen (a type of indicating knowledge.Mole etc. special mark on the body). अष्टांग निमित्तज्ञान का एक भेद; सिर, मुख आदि में, रहने वाले तिल आदि व्यंजन कहलाते हैं ” इनसे लाभ- अलाभ आदि को जान लेना व्यंजन निमित्त ज्ञान है “
उत्तरभाद्रपद नक्षत्र Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूत भावी उपचार – Bhuta Bhavi Upachaar. Causative implication related to the past & fu-ture. भूत एवं भविष्य से संबंधित कारण में कार्य का उपचार करना “