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[[श्रेणी: शब्दकोष]] पर: Another.दूसरा ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुखनिर्विष ऋद्धि–Mukhanirvisha Riddhi. A type of super natural power of making poisionless. जिस ऋद्धि के प्रभाव से उग्र विष से मिला हुआ आहार भी जिनके मुख में जाकर निर्विष हो जाता है अथवा जिनके मुख से निकले हुए वचन के सुनने मात्र से महाविष व्याप्त भी कोई व्यक्ति निर्विष हो जाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक् (वचन) – Vaak (Vachana). Different types of speech. शुभ –अशुभ रूप बोलने अथवा उच्चारण करने की क्रिया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमावगमेश – Panchamaavagamesha. Omniscient one. पंचमज्ञान, केवलज्ञान के स्वामी “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पभोसा (तीर्थ):Name of a pace of pilgrimage which is the institution & Omniscience place of the 6th Tirthankar (Jaina Lorde) Padmaprabh situated near Kaushambi (U.P) उत्तर प्रदेश में कौशम्बी के निकट बसा एक तीर्थ । छठे तीर्थकर भगवान पदमप्रभ की दीक्षा एवं केवलज्ञान कल्याणक भूमि । पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्लेच्छ खण्ड–Mlechha Khand. Particular parts of earth according to Jain Philosophy where Mlechha people live. म्लेच्छ मनुष्योंकी आवास भूमि”
उपेक्षा Indifference, Negligence, Overlooking . रागद्वेष रूप परिणामों का नहीं होना वैराग्य संबंध न रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मावती कल्प:A book written by Mallishen Bhattarak. मल्लिषेण भटटारक (ई0 श0 11) कृत तान्त्रिक ग्रंथ ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोक्षमार्ग प्रकाशक–Mokshmarg Prkashak. Name of a book written by Pandit Todarmalji. प. टोडरमल जी द्वारा रचित एक ग्रंथ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसुमित्र – Vasumitra.: Name of the 36th chief disciple of Lord Rishabhdev,Name of the chieftain of Shak dynasty. तीर्थंकर ऋषभदेव के 36वें गणधर “मगध देश की राज्य वंशावली अनुसार यह शक जाति का सरदार था ,अपरनाम बलमित्र अग्रिमित्र का समकालीन था ,समय –वी. नि. 285-345 “