शुचिशाल!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुचिशाल – Shuchishaala. The 67th chief disciple of Lord Rishadev. भगवान ऋषभदेव के 67 वें गणधर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुचिशाल – Shuchishaala. The 67th chief disciple of Lord Rishadev. भगवान ऋषभदेव के 67 वें गणधर “
एकपर्वा A supernatural knowledge of medicine. एक औषधि विद्या जो नमि, विनमि को देवियों से मिली थी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र – Shukra . Name of the 87th planet, the 9th heaven and the first Indrak (layer) of shukra heaven. 87वां ग्रह, 9वां स्वर्ग, शुक्र स्वर्ग का प्रथम इन्द्रक “
एकद्रव्य Unitariness in matters. धर्म, अधर्म और आकाश ये तीनों द्रव्य की अपेक्षा एक ही है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचिक विनय – Vaachika Vinaya.: To pay reverence to saints by eulogical speech. उपचार विनय का एक भेद; उपशांत ,सावद्य क्रियारहित, अभिमान रहित वचन गुरुओं –साधुओं के सामने बोलना “
द्रव्यतीर्थ Place of pilgrimages. तीर्थंकरों की कल्याणक भूमियाँ, सिद्धक्षेत्र, अतिशयक्षेत्र आदि जिनकी वंदना – अर्चना संसार से तिरने में सहायक होती है। जैसे- अयोध्या, सम्मेदशिखर, कुण्डलपुर आदि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]] तीर्थंकरों के पंच कल्याणकों से एवं महापुरुषों के तप- त्याग से पवित्र स्थलों को द्रव्यतीर्थ कहते हैं ।इस द्रव्यतीर्थ को जैन शास्त्रों में तीन भागों में…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मासैकवासिता – Masaikavasita. Monthly seasonal staying & moving of Jaina saints. स्थिति कल्प का ९ वां भेद; छहों ऋतुओं में से एकेक ऋतु में एक मांस तक एक स्थान में मुनि निवास करते हैं, और एक मास विहार करते हैं ” उसे मासैकवासिता कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचसमिति – Panchasamiti. Five kinds of saint conduct related to carefulness. ईर्या, भाषा, एषणा, आदाननिक्षेपण और प्रतिष्ठापन यें पांच समिति संयम शुद्धि में कारण कही गयीं हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वागर्थसंग्रह – Vaagarthasangraha.: Name of a treatise composed by the poet Parmeshthi containing the life sketch of 63 great personalities. कवि परमेष्ठी कृत एक संस्कृत ग्रन्थ ” इसमें 63 शलाका पुरुषों का वर्णन है “