विभाव – स्वभाव!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव – स्वभाव – Vibhava – Svabhava. Nature contrary to the real nature. कर्मबंध के प्रकरण में रागादि परिणाम भी अशुद्ध निश्चयनय से जीव के स्वभाव कहे जाते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव – स्वभाव – Vibhava – Svabhava. Nature contrary to the real nature. कर्मबंध के प्रकरण में रागादि परिणाम भी अशुद्ध निश्चयनय से जीव के स्वभाव कहे जाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पदंत पुराण – Puspadamta Purana. A book written by Acharya Gunvarma. आचार्य गुणवर्म (ई. १२३०) कृत एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्करद्वीप सिध्द – Puskaradvipa Siddha. Beings getting salvation from Pushkarardhadvip (island). पुष्करार्ध द्वीप से सिध्द होने वाले जीव (संख्यात) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुरवा – Pururava. Name of a tribal persone who was the soul of Lord Mahavira in the past 34th birth. एक भील जो की महावीर भगवान का दूरवर्ती- ३४वा पूर्वभव है, जब उसने एक दिगम्बर मुनिराज से मघ, मांस, मधु त्याग का नियम ग्रहण किया था “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == गति : == नीचैर्वृत्तिरधर्मेण धर्मेणोच्चै: स्थितिं भजेत्। तस्मादुच्चै: पदंं वांछन् नरो धर्मपरो भवेत्।। —आदिपुराण : १०-११९ अधर्म से मनुष्य की अधोगति होती है और धर्म से ऊध्र्वगति (ऊँची गति)। अत: जीवन में ऊध्र्वगति चाहने वाले को धर्म का आचरण करना चाहिए।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराकल्प – Purakalpa. Old time pertaining to traditional theory. एतिह्या सहचरित विधि को पुराकल्प कहते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदक सम्यग्दृष्टि –VedakaSamyagdrsti One with destructive subsidential right faith क्षयोपशम सम्यक्त्व वाला जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञापरिषहजय – Pragyaaparishahajaya. Proudlessness of knowledge or intellect (sagacity with proudlessness). अनेक शास्त्रों में निपुण होते हुए भी जो साधू अपने ज्ञान का अभिमान नहीं करता, समता रखता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसार विचय – Sansaara Vichaya. Contemplation about the transformable nature of the matter, region, time, realm of the life and emotions. द्रव्य, क्षेत्र, काल, भव एवं भावरूप पंचपरावर्तन के स्वरुप का चिंतन करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगिनी – Bhujangini. One of the super power possessed by Ravan. रावण को प्राप्त अनेक विधाओं में एक विधा “