नाट्यशाला!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाट्यशाला – Natyasala place of dancing related to Samavashran (assembly of lord arihant. समवशरण में जहां देवकन्याएँ नृत्य करती है ” “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाट्यशाला – Natyasala place of dancing related to Samavashran (assembly of lord arihant. समवशरण में जहां देवकन्याएँ नृत्य करती है ” “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्त्री – Bhava Stri. Psychical female one. स्त्री वेद के उदय से पुरुष की अभिलाषा रूप मैथुन संज्ञा का धारक जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिकेशव – Pratikeshava. Pratinarayana (noble person). प्रतिनारायण “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्दावण – Viddavana. Rending or splitting the body organs of beings for trade. प्राणियों के छेदन आदि का व्यापार विद्दावण कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पवती – Puspavati. Name of a chief female divinity of an Indra of Kinnar type. किन्नर जाति के व्यंतरों के इन्द्र ‘महापुरुष’ की वल्लभिकादेवी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नावशेष – Bhagnavasesa. Ruins, broken remains. टूटे हुए अवशेष “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्प – Puspa. Flowers, an article for worshipping Lord Arihant. फूल- चंपा, चमेली, गुलाब आदि. भगवान की पूजन में प्रयुक्त अष्ट द्रव्यों में एक द्रव्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषाकार – Purusakara. A particular standing posture of male (shape of Teen Lok). तीन लोक का आकार पुरुषाकार कहलाता है (दोनों पैर फैलाकर दोनों हाथों को कमर पर रखकर खड़े पुरुष का आकार) “
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु—विराधना : == यस्य गुरौ न भक्ति:, न च बहुमान: न गौरवं न भयम्। नापि लज्जा नापि स्नेह:, गुरुकुलवासेन किं तस्य ? —समणसुत्त : २९ जिसमें गुरु के प्रति न भक्ति है, न बहुमान है, न गौरव है, न भय (अनुशासन) है, न लज्जा है तथा न स्नेह है, उसका…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरातत्त्व – Puratattva. Archaeology. पुरातन, प्राचीन अवशेष “