तत्!
तत् The same (pronoun), that thing, A stringed musical instrument. सर्वनाम पद पूर्व प्रकरण में आये हुए अर्थ का परामर्शक होता है तार से बजाये जाने वाले वीणा आदि वाद्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत् The same (pronoun), that thing, A stringed musical instrument. सर्वनाम पद पूर्व प्रकरण में आये हुए अर्थ का परामर्शक होता है तार से बजाये जाने वाले वीणा आदि वाद्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दिव्यभाषा Resonant voice of Lord Arihant (Divyadhvani). नाना भाषाओं (718) में परिणत होने के अतिशय से सम्पन्न अर्हद्वाणी (दिव्यध्वनि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
जघन्य ज्ञान Minimum knowledge. पर्यायज्ञान ; सूक्ष्म निगोदया लब्ध्यपर्याप्तक के सबसे जघन्य ज्ञान होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
णमोंकार यंत्र A metallic plate engraved with some auspic-ious mystic words ¯amokåra Ma´tra or some numbers. णमोकार मंत्र या अंक लिखित धातु की प्लेट । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रथमानुयोग- श्रुतस्कंध के 4 अनुयोंगों में प्रथम अनुयोग, इसमें तीर्थकर आदि त्रेसठ शलाकापुरुशों के चरित्र का वर्णन होता है। prathamanuyoga – biographical exposition related to jain – lord and great personalities of jain context.
छाया-व्याख्या टीका A book written by Nagoji Bhatta. योगदर्शन साहित्य प्रवर्तक नागोजी भट्ट (ई.श. १७) कृत एक रचना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सल्लेखना काल – Sallekhanaa kaala. Time duration of Salekhana (holy death of saints). रागादि विकल्पों के कृष करने रूप भाव सल्लेखना तथा उसी के अर्थ में कायक्लेषादि के अनुष्ठान रूप् द्रव्यसल्लेखना है इन दोनों का आचरण करना सल्लेखना काल है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव गुण पर्याय – Vibhava Artha Paryaya. See- Vibhava Artha Paryaya. देखें – विभाव अर्थ पर्याय “
जंघा चारण ऋद्धि A type of supernatural power of violenceless movement without bending the knees. ऋद्धि; जिसके प्रभाव से घुटनों को मोड़े बिना पृथिवीकायिक जीवों को बाधा न करके गमन किया जा सके ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वार्थसिद्धि – Sarvaarthasiddhi One of this 5 Anuttar Vimans (Space crafts-dwelling place of Indras). Name of a palanquin used by Lord Shantinath. 5 अनुत्तर विमानों में एक इन्द्रक विमान, जहाॅं जन्म लेने वाले अहमिन्द्र देव मनुष्य का एक भव धारण कर नियम से मोक्ष प्राप्त करते है। एक पालकी, तीर्थकर शांतिनाथ इसी में बैठकर…