खड्गपुरी!
खड्गपुरी A main city of Avarta country of east Videh (region). पूर्व विदेह में स्थित आवर्ता देश की मुख्य नगरी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
खड्गपुरी A main city of Avarta country of east Videh (region). पूर्व विदेह में स्थित आवर्ता देश की मुख्य नगरी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति विभाग (मूल/उत्तर ) – Prakrti Vibhaga (Mula/Uttara). Division of karmic natures (primary/second- ary). कर्म प्रक्रतियां के भेद; मूल कर्म प्रक्रतियां ८ एवं उत्तर कर्म प्रक्रतियां १४८ हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरिणामना – Viparinamana. Change or modification in state. सत् के द्वारा अवस्थान्तर की प्राप्ति होना ” यह प्रक्रति विपरिणामना, स्थितिविपरिणामना, अनुभाग- विपरिणामना, प्रदेशविपरिणामना ४ प्रकार की होती है “
खलूरिका Armoury, Archery learning place, Parade ground. आयुधशाला, धनुर्विद्या सीखने का स्थान, परेड का मैदान । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरत – Virata. Free from woridly attachment, Indifferent, the 6th & 7th stages of spiritual development. संयम ” गुणस्थान – छठा, सातवां “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सुख : == जं च कामसुहं लोए जं च दिव्वं महासुहं। वीतरागसुहस्सेदे णंतभागं पि णग्घई।। —मूलाचार : १४४ लोक में काम—भोगों से मिलने वाला सुख और देवों को मिलने वाला महासुख उस सुख का अनंतवाँ हिस्सा भी नहीं, जो वीतराग को प्राप्त हुआ करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिश्रवण – Pratishravana. Counter listening ( afault of saint food taking-acceptance of food with counter listening of preparation of food for self purpose). जैन साधू के आहार से संबंधितअनुमति दोष के 3 भेदों में से एक भेद; ‘यह आहार आपके लिए निमित्त बनाया गया है’ आहार से पहिले या पीछे इस परकार के वचन…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रबाहुचरित – Bhadrabahucarita. A book written by Acharya Ratnakirti. आचार्य रत्नकीर्ति (ई. १५१५) द्वारा रचित एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलेखन – Partilekhana. Purifying the place, article etc. with Pichhika by jaina-saints for non-voilence. जैन साधू-साध्वियों द्वारा उठते-बैठते आदि समय पिच्छिका से स्थान , वस्तु आदि का जीवरक्षा हेतु परिमार्जन करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुखधन – Mukhdhan. Something principal. आदि स्थान में जो प्रमाण या संख्या है वह मुखधन कहलाती है”