त्रिगर्त!
त्रिगर्त Sovereign of three Khands (divisions) of Bharat Kshetra etc. भरत क्षेत्र मध्य आर्य खण्ड का देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिगर्त Sovereign of three Khands (divisions) of Bharat Kshetra etc. भरत क्षेत्र मध्य आर्य खण्ड का देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुकुंद– Mukund. Name of a mountain of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरत क्षेत्र के आर्य खण्ड का एक पर्वत”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकल्प – Sankalpa. Resolution, Determination, Will. प्रतिज्ञा, कामनाशक्ति, चेतन-अचेतन आदि पदार्थो में ‘ये मेरे हैं’ ऐसी कल्पना करना संकल्प है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभिकीर्ति – Nabhikirti Name of a Bhattarak of Nandi group नंदी संघ के एक भट्टारक का नाम ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निक्षेप : == युक्ति—सुयुक्तमार्गे, यत् चतुर्भेदेन भवति खलु स्थापनम्। कार्ये सति नामादिषु, स निक्षेपो भवेत् समये।। —समणसुत्त : ७३७ युक्तिपूर्वक उपयुक्त मार्ग में प्रयोजनवश नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव में पदार्थ की स्थापना को आगम में निक्षेप कहा गया है। द्रव्यं खलु भवति द्विविधं, आगमनोआगमाभ्याम् यथा भणितम्। अर्हत्—शास्त्रज्ञायक:…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षोडश स्वप्न – Sodasha Svapna. Sixteen auspicious meaningful dreams seen by Tirthankar’s (Jaina Lord’s) mother. तीर्थंकर माता को दिखने वाले 16 स्वप्न; ऐरावत हाथी, बैल, सिंह, दो माला, लक्ष्मी, पूर्ण चन्द्रमा, सूर्य, दो कलश, मछली युगल, सरोवर, समुद्र, सिंहासन, देवों का विमान, नागेन्द्र भवन, रत्न राशि, निर्धूम अग्नि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रियोदभव क्रिया- गृहस्थ की 53 क्रियाओं में एक क्रिया; प्रसूति होने पर जातकर्मरुप मन्त्र व पूजन आदि का बड़ा पमजन-विधान आदि करना। Priyodbhava kriya- To organize an auspicious & reverential celebration (pujan vidhan) on the birth of a child ( a duty of householder)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागौर – Nagaura Name of a place एक स्थान जिसके नजदीक कही मण्डल गढ़ नगर में पं. आशाधर जी का जन्म लिखी ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पेशी – Pashi. Muscles. औदारिक शरीर में पाई जाने वाली माँसपेशियाँ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्द्रव्य – Saddravya. Six universal entities (Jiva-soul, Pudgal-matter, Dharma-medium of motion, Adharma-medium of rest, Akash-sky, Kal-time). छः द्रव्य – जीव,पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश, काल “