प्रतिलेखन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलेखन – Partilekhana. Purifying the place, article etc. with Pichhika by jaina-saints for non-voilence. जैन साधू-साध्वियों द्वारा उठते-बैठते आदि समय पिच्छिका से स्थान , वस्तु आदि का जीवरक्षा हेतु परिमार्जन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलेखन – Partilekhana. Purifying the place, article etc. with Pichhika by jaina-saints for non-voilence. जैन साधू-साध्वियों द्वारा उठते-बैठते आदि समय पिच्छिका से स्थान , वस्तु आदि का जीवरक्षा हेतु परिमार्जन करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्दावण – Viddavana. Rending or splitting the body organs of beings for trade. प्राणियों के छेदन आदि का व्यापार विद्दावण कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिमा योग – Pratimaa Yoga. A posture of meditation (standing erect). कायोत्सर्ग मुद्रा; इसमें प्रतिमा के सामने खड़े होकर ध्यान किया जाता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नावशेष – Bhagnavasesa. Ruins, broken remains. टूटे हुए अवशेष “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिभा – Pratibhaa. Talent, genius, brilliancy. प्रज्ञा, मेघा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पतिबंध – Pratibandha. Prohibition, Restriction, Limitation, Hindrance. निषेध होना ” अवरोध, विरोध “
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु—विराधना : == यस्य गुरौ न भक्ति:, न च बहुमान: न गौरवं न भयम्। नापि लज्जा नापि स्नेह:, गुरुकुलवासेन किं तस्य ? —समणसुत्त : २९ जिसमें गुरु के प्रति न भक्ति है, न बहुमान है, न गौरव है, न भय (अनुशासन) है, न लज्जा है तथा न स्नेह है, उसका…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतितंत्र – Pratitantra. Ambiguous meaning (indistinct). एक शास्त्र में सिद्ध और दूसरे शास्त्र में असिद्ध अर्थ प्रतितंत्र कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदि अन्वय – Namdi Anvaya A group of saints of Dravid sangh. द्रविड़ संघ के एक गच्छ का नाम ”