पारिणामिक भाव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक भाव – Parinamika Bhava. A type of instinct of nature of living beings. जीव के निज ५ भावों में एक भाव. इसके तीन भेद होते हैं- जीवत्व, भव्यत्व और अभव्यत्व “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक भाव – Parinamika Bhava. A type of instinct of nature of living beings. जीव के निज ५ भावों में एक भाव. इसके तीन भेद होते हैं- जीवत्व, भव्यत्व और अभव्यत्व “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूचिर – रूचक पर्वत पर स्थित एक कूट, सौधर्म एषान स्वर्ग का 16 वां पटल व इन्द्रक। Rucira-Name of a summit of ruchak mountain, name of the 16th Patal (layer) and Indrak of Eshan heaven
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुभौम – Subhauma. Name of the 8th Chakravarti (emperor). 8वे चक्रवर्ती, जो णमोकार मंत्र का अपमान करने के कारण मरकर 7 वे नरक में गयें ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारंगत – Paramgata. Well versed, expert. निपुण, कुशल. द्वादशांग के पारंगत मुनि को श्रुतकेवली कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नसंचय – विजयार्घ की दक्षिण श्रेणी एवं पष्चिम विदेह क्षंेत्र के नगर का नाम Ratnasancaya- Name of a city situated in Southern Vijayardh Mountain & city of western videh region
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लुंका-Lunkaa.: One who started lunkaa philosophy. गुजरात(अणहिल नगर) में कुलुम्बी वंशीय एक महामानी लुंका जिसने लुंकामत (ढूंढिया मत) चलाया “अपरनाम स्थानकवासी एक श्वेताम्बर मत ” समय – वि.सं. 1527 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापभीरुता – Papabhiruta. Fearfulness from sins. पाप से भयभीतपना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नप्रभा – अघोलोक की प्रथम भूमि,रूढि का नाम घम्मा है। यह एक लाख 80 हजार योजन मोटी हैं। इसके तीन भाग है – खर भाग, पंक भाग अब्बहुल भाग। इसमे खर भाग पंक भाग में भवनवासी और व्यंतर देवो के भवन है। आंैर तीसरे भाग अब्बहुल में नारकियों के भवन है। Ratnaprabha- Name of…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पादानुसारी ऋद्वि : A type of supermatural power causing knowledge of whole scriptures by studying only fraction of it.समस्त श्रुत के अक्षर पदो को जानने वाली बुद्वि रुप ऋद्वि है।