लिंगज श्रुतज्ञान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंगज श्रुतज्ञान – अनक्षरात्मक श्रुतज्ञान, चिन्ह से उत्पन्न होने वाला श्रुतज्ञान। Limgaja Srutajnana-A kind of symbolic knowledge pertaining to Shrutgyan (scriptural knowledge), Unsyllabic knowledge
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंगज श्रुतज्ञान – अनक्षरात्मक श्रुतज्ञान, चिन्ह से उत्पन्न होने वाला श्रुतज्ञान। Limgaja Srutajnana-A kind of symbolic knowledge pertaining to Shrutgyan (scriptural knowledge), Unsyllabic knowledge
जयपुरी A city in the south of Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादोपनिषद् – Syaadvaadopanisad. Name of a Book written by Acharya Somsen.आचार्य सोमसेन (ई0 943-968) कृत स्याद्वाद न्याय का प्ररुपक संस्कृत भाषाबद्व ग्रंथ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योषा – स्त्री का एक पर्यायवाची नाम इसे युवती कहते हैैै। Yosa-Young women
जनादर्शन A Marathi poet and writer of ‘Shrenik Charit’, An epithet of Vishnu. मराठी कवि , श्रेणिक चरित के रचयिता (ई. १७६८) , विष्णु को भी जनादर्शन कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादवक्तव्य – Syaadavaktavya. The 4th bhang of saptbhangi-exposition of the nature of the substance in the aspect of indescribability. सप्तभंगी का चैथा भंग, द्रव्य स्वद्रव्य क्षेत्र काल भाव से और परद्रव्य क्षेत्र काल भाव से युगफद् कथन न किया जाने से कथंचित् अवक्तव्य है।
तीर्थविहार Saints moving towards place of pilgrimages. मुनि, आचार्य आदि, साधुओं का तीर्थों के लिए गमन करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तत्सेवी A fault of criticism. आलोचना का एक अतिचार। बडे प्रायश्चित से बचने हेतु पाश्र्वस्थ मुनि का गुरू के पास न जाकर पाश्र्वस्थ मुनि के पास अपने दोष कहना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
जघन्य योगस्थान Lowest grade of vibratory activity of soul. स्थान प्ररूपणा के अनुसार श्रेणि के असंख्यातवें भाग मात्र जो असंख्यात स्पर्धक हैं उनका एक जघन्य योग स्थान होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]