धृर्तिकर!
धृर्तिकर A king of Kuru dynasty. एक कुरूवंशी राजा। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गर्दतोय A division of special heavenly deities (Laukantik). लौकान्तिक देवों का एक भेद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाम – Prakama. Name of the 4th pre-destined Rudra. भविष्यत् कालीन चौथे रूद्र का नाम “
धूपदशमी व्रत A vow (fasting) on the day of Dhupadashmi, one of the Jaina festival. दशलक्षण पर्व में आने वाली दशमी को शीतलनाथ भगवान की पूजा- जाप्य एवं उपवास करना। धूपदशमी के दिन मंदिरों में सामूहिकरूप में अग्नि में धूप खेने की प्राचीन परम्परा है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गरूड़ Ruling demigod of Jaina Lord Shantinath, 4th Patal (layer) of sanatkumar heaven, Eagle or a large vulture. शांतिनाथ भगवान का शासन यक्ष. सनत्कुमार स्वर्ग का चौथा पटल. एक विशालकाय पक्षी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संयम : == यथा कूर्म: स्वअंगानि, स्वके देहे समाहरेत्। एवं पापानि मेधावी, अध्यात्मना समाहरेत्।। —समणसुत्त : १३७ जैसे कछुवा अपने अंगों को अपने शरीर में समेट लेता है, वैसे ही मेधावी (ज्ञानी) पुरुष पापों को अध्यात्म के द्वारा समेट लेता है। वय समिदि कसायाणं दंडाणं तह इंदियाण पंचण्हं।…
धारणा Retention of known objects. मतिज्ञान के 4 भेदों में एक भेद ; अवायज्ञान के द्वारा जाने गये पदार्थ का विस्मरण नहीं होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]] या 5 conceptual stages of meditation (Pindastha). पिण्डस्थ ध्यान की 5 धारणाएँ मानी हैं- पार्थिवी , आग्नेयी, वायवी, वारूणी एंव तत्वरूपवती। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गंगदेव Name of an Acharya possessing knowledge of 10 purvas & 11 angas. एक आचार्य जिनका नाम ‘देव’ था , भद्रबाहु प्रथम के पश्चात् दसवें, ११ अंग व पूर्वधारी हुए थे । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
धर्मोपदेष्टा Preceptor, Religious teacher (saint or sage). वक्ता धर्म का उपदेश देने वाला , जो समस्त श्रुत को जानता है एंव जिसके मन, वचन, काय की प्रवृत्ति शुद्ध है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आचारांग A part of scriptural knowledge (shrutgyan) containing description about conduct of saints & householdess. जिनवाणी के 12 अंगों में पहला अंग जिसमें मुनि एंव श्रावकों के आचरण का कथन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]