चतुर्दश भूत ग्राम!
चतुर्दश भूत ग्राम Fourteen Jiva Samas are called Chaturdash Bhutgram. चौदह जीव समास ही चौबीस भूत ग्राम अर्थात् जीवसमूह कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दश भूत ग्राम Fourteen Jiva Samas are called Chaturdash Bhutgram. चौदह जीव समास ही चौबीस भूत ग्राम अर्थात् जीवसमूह कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समपर्यकासन तप – Samaparyamkaasana Tapa. A meditational posture (as austerity). कायक्लेश तप का एक भेद। आसन-जिसमें पिडंलियाॅ और स्फिक बराबर मिल जायें वह समपर्यकासन है।
दुःप्रणिधान Arrogant or Illusive tendency (an infraction). सामायिक शिक्षा व्रत का एक अतिचार । सामायिक के समय मन – वचन- काय की प्रवृत्ति रागरूप या प्रमादरूप होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चरण Ascetic conduct, involving in introspection. चारित्र ; अपने में अर्थात् ज्ञानस्वभाव में ही निरंतर रमण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्य ग्रैवेयक – Madhya Graviveyaka. Three particular heavenly abodes among 9 Graiveyaks. 9 ग्रैवेयक विमानों में बीच के तीन विमान ;यशोधर,सुभद्र , सुविशाल “
दीप A lighted lamp, An auspicious device which is to be kept near idol in the temple, A worshipping article. मंदिरों में प्रतिमा के समीप रहने वाले 108 उपकरणों में से एक , पूजा साम्रगी का एक द्रव्य।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गोरति Name of a Vidyadhar-one proficient in super power by birth. एक महारथी विद्याधर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद्यांग जातीय कल्प वृक्ष- Madyamga Jatiya Kalpavrksha. A type of wish fulfilling tree (providing exhilarating liquids). कल्पवृक्ष ; फैलती हुई सुंगंधि से युक्त तथा अमृत के समान मीठे मधु-मैरेय, सीधु, अरिष्ट और आसव आदि अनेक प्रकार के रसों को प्रदान करने वाले कल्प वृक्ष ” उपचार से इन वृक्षों को मद्यांग कहा है…
दिग्वास Former name of Digambar Jain community. A name of Jain Lord. दिगम्बर सम्प्रदाय को पूर्व में निग्र्रन्थ श्रमण संघ के नाम से पुकारा जाता था । उपरांत वह दिग्वास और फिर दिगम्बर कहलाने लगा । भगवान के 1008 नामों में से एक नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ – Shubha. Auspicious, Prosperous, Lucky, A type of physique making Karma Causing attractive body. मांगलिक, समृद्धशाली, नामकर्म का एक भेद जिसके उदय से शरीर रमणीय होता है “