गतदेह!
गतदेह Bodiless salvated soul (Lord Siddha). अशरीरी सिद्ध भगवान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गतदेह Bodiless salvated soul (Lord Siddha). अशरीरी सिद्ध भगवान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्व जिनचैत्य क्रिया – Poorva jinachaitya kriyaa. A type of relegious activity pertaining to reveieing of the same idol of Lord in particular period of 6 months. विहार करते छः महीने से पहले उसी प्रतिमा के पुनः दर्शन हो तो उसे पूर्व जिनचैत्य कहते हैं एवं पूर्व जिनचैत्य का दर्शन करते समय पाक्षिकी क्रिया…
गणधर Chief disciple (Gandhar) of Teerthankar (Jaina lord). तीर्थंकर के प्रमुख शिष्य इनके अन्य नाम गणी, गणीश ,गणपति ,गणेश आदि भी हैं। ये समस्त श्रुत के पारगामी, सातों ऋद्धियों के धारक, मुनियों के स्वामी एवं चार ज्ञानधारी होते हैं। [[महावीर स्वामी के गणधर]] [[श्रेणी:शब्दकोष]]
खातफल A measure unit, Volume. क्षेत्रफल को गहराई से गुणा करने पर खात फल होता है । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मौक्तिक प्रशस्त निदान–Mauktik Prashast Nidan. To desire for the state of ommiscience. कर्म नाश, संसार के दुखो की हानि व केवलज्ञान का इच्छा रूप निदान”
खातिका Name of the 2nd auspicious land of Samavsharan -the holy assembly of Jaina Lord. समावशरण की द्वितीय भूमि । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
आटे का मुर्गा Name of a religious novel containing the greatness of non-violence written by Ganini Aryika Shri Gyanmati Mataji. गणिनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी द्वारा रचित एक धार्मिक उपन्यास। जिसमें राजा यशोधर द्वारा मात्र आटे के मुर्गे की बलि दिये जाने से अनेक जन्मों तक उठाये गये दुःखों का वर्णन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष उपयोग – Vishesha. Special consciousness. ज्ञानोपयोग या साकारोपयोग, जो सामान्य – विशेशात्म्क पदार्थो के आकार को ग्रहण करे अर्थात् ज्ञान पदार्थो को विशेष करके जानता है “
खड्गासन A type of meditative relaxation, A posture of meditation, Salvation posture of Lord Mahavir. कायोत्सर्ग ; दोनों हाथ लंबे लटकाकर ४ अंगुल के अंतर से पगों को रखकर सीधा ध्यानरूप खडा होना. भगवान महावीर ने इसी खड्गासन मुद्रा से मोक्ष प्राप्त किया था ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवपरिवर्तन – Bhavaparivartana. Transmigration, Rebirth cycle. पंचपरावर्तन में एक परिवर्तन; देवलोक के ९ अनुदिश, ५ अनुत्तर इन १४ विमानों को छोडकर शेष चारों गतियों में गमनागमन भव परिवर्तन कहलाता हैं “