भाव सामायिक!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव सामायिक – Bhava Samayika. Equanimity in pain & pleasure. सुख – दुःख में साम्यभाव धारण कर मैत्रीभाव के साथ सम्पूर्ण सावध से निर्वत्त ह्नुं, इन भावों के साथ सामायिक करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव सामायिक – Bhava Samayika. Equanimity in pain & pleasure. सुख – दुःख में साम्यभाव धारण कर मैत्रीभाव के साथ सम्पूर्ण सावध से निर्वत्त ह्नुं, इन भावों के साथ सामायिक करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूमिशय्याव्रत – Bhumishayyavrata. A basic restraint of Jaina saints, to sleep on the earth. साधु के २८ मूलगुणों में एक मूलगुण; पृथिवी पर शयन करना “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोक्त्रत्व नय:A viewpoint believing that soul is the enjoyer of joy & sorrow. नय; जिसकी अपेक्षा से आत्मद्रव्य सुख-दुखादि का भोक्ताहै “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभीषण – Vibhishana. The younger brother of Ravan, who ultimately initiated with Ram Chandra and became a heav-enly deity. रावण का छोटा भाई व रत्नश्रावा का पुत्र ” अंत में राम के साथ दीक्षित हुआ और अनुदिश विमान में देव हुआ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरिणामना – Viparinamana. Change or modification in state. सत् के द्वारा अवस्थान्तर की प्राप्ति होना ” यह प्रक्रति विपरिणामना, स्थितिविपरिणामना, अनुभाग- विपरिणामना, प्रदेशविपरिणामना ४ प्रकार की होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबिम्ब – Pratibimba. Image, Idol of Lord. परछाई, भगवान की प्रतिमा-मूर्ती “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सुख : == जं च कामसुहं लोए जं च दिव्वं महासुहं। वीतरागसुहस्सेदे णंतभागं पि णग्घई।। —मूलाचार : १४४ लोक में काम—भोगों से मिलने वाला सुख और देवों को मिलने वाला महासुख उस सुख का अनंतवाँ हिस्सा भी नहीं, जो वीतराग को प्राप्त हुआ करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिपत्ति – Pratipatti. A type of scriptual knowledge (Shrutgyan), confirmed knowledge (inference). अर्थलिंगज श्रुतज्ञान का एक भेद, धारणा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रबाहुचरित – Bhadrabahucarita. A book written by Acharya Ratnakirti. आचार्य रत्नकीर्ति (ई. १५१५) द्वारा रचित एक ग्रंथ “