चतुर्मुखमह!
चतुर्मुखमह A type of worship (performed by kings). सर्वतोभद्र पूजा ; पूजा का एक भेद जो मुकुटबद्ध राजाओं के द्वारा की जाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्मुखमह A type of worship (performed by kings). सर्वतोभद्र पूजा ; पूजा का एक भेद जो मुकुटबद्ध राजाओं के द्वारा की जाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यक्तव क्रिया – Samyaktva Kriyaa. Worshipping the Jaina Lord, scriptures & saints. साम्परायिक आस्त्रव की 25 क्रियाओ मे पहली क्रिया। सच्चे देव शास्त्र गुरु की पूजा-भक्ति आदि करना। इससे सम्यक्तव की प्राप्ति और पुण्यबंध होता है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यशस्विनी–Yashasvini. Name of a female divinity of Ruchak mountain. रुचक पर्वत निवासिनी दिक्कुमारी देवी”
चतुष्टय Infinite perception-knowledge-bliss and potence togetherly called Chatushtay. अनंतदर्शन ,अनंतज्ञान ,अनंतसुख, अनंतवीर्य ये चार अनंतचतुष्टय कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मद – Sammada. Name of the 2nd predestined Rudra. भावी दूसरा रुद्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रतिवाक् – सत्यप्रवाद में वर्णित 12 प्रकार की भाशाओं में राग को उत्पन्न करने वाली एक भाशा Rativak-A type of language causing passion and attachment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्तुति विद्या – Stuti Vidyaa. Name of a treatise written by Acharya. Samantbhadra.आचार्य समन्तभद्र द्वारा संस्कृत भक्ति विषयक ग्रन्थ, जिनषतक। समय – ई0 120. 185।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रतिकर – नंदीष्वर द्वीप की चारों दिषाओं में स्थित वापिकाओं कें कोणों के समीप स्थित स्र्वणमय ढोलक के आकार वाले पर्वत Ratikara- Golden and cylindrical mountains situated in all sides of Nandishvar island
चित्कर्म Activities causing accumulation of Punya (meritorious Karmas). जिससे पुण्य कर्म का संचय हो वह चित्कर्म है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]