गणधरवलय विधान!
गणधरवलय विधान Name of a worshipping composition composed by Ganini Shri Gyanmati Mataji. ‘णमो जीनाणं’ आदि गणधरवलय मन्त्रों पर आधारित पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा लिखित एक पूजन विधान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गणधरवलय विधान Name of a worshipping composition composed by Ganini Shri Gyanmati Mataji. ‘णमो जीनाणं’ आदि गणधरवलय मन्त्रों पर आधारित पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा लिखित एक पूजन विधान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चय प्रमाण A mathematical result. सर्वधन में पद के वर्ग का भाग देने पर जो लब्ध आये उसमें संख्यात का भाग पर चय का प्रमाण निकलता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाचार काल – Samaachaara Kaala. Reverence paying period (of Jaina Saints). वंदना काल, नियमकाल, स्वाघ्यायकाल व घ्यान काल आदि जैन साधुओ के समाचार काल है।
उद्वर्तन Rising up (from lower living state). नरकगति व भवनत्रिकदेवगति से निकलना एंव उद्धार होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चिंतागति Son of the king Suryaprabh of Suryaprabh city in the north of Vijayardh mountain. विजयार्ध पर्वत की उत्तर श्रेणी में सूर्यप्रभ नगर के राजा सूर्यप्रभ का पुत्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
थावर प्रतिमा Stable image of any thing. व्यवहार से चंदन, कनक, महामणि, स्फटिक आदि से बनी प्रतिमा थावर कहलाती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ विचार – Shubha Vichaara. Auspicious & healthy thoughts or thinking. संयम आदि के उत्तम विचार रखना एवं आर्त-रौद्र ध्यान का त्याग करना “
त्रैराशिकवाद Doctrine related to the conception of trio thoughts (like Jiva, Ajiva, Jiva-ajiva etc.). सर्व वस्तुओं को त्रयात्मक मानना अर्थात् तीन राशियों द्वारा चरण करने का सिद्धान्त जैसे जीव, अजीव , जीवाजीव, लोक , अलोक लोकालोक आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ तैजस समुद्र्घात – Shubha Taijasa Samudghaata. Emanation of auspicious radiant effigy like body (spiritual form) from a super saint causing prosperity all around. ऋद्धिधारी मुनि को दया अनुकंपा आने पर दाहिने कंधे से हंस और शंख वर्ण वाला शरीर निकलकर जो दुर्भिक्ष आदि सर्व बाधा को नष्ट कर सुख उत्पन्न करता है “
त्रिवेदसिद्ध Beings salvated from all genders (in accordance with Bhavved). भाववेद की अपेक्षा जो तीनों वेदों से सिद्ध होते हैं त्रिवेदसिद्ध कहलाते है । द्रव्य से पुरूष वेदी, भाव से स्त्री वेदी एंव नपुंसक वेदी भी सिद्ध पद को प्राप्त कर सकते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]