भय दोष!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय दोष – Bhaya Dosa. A fault; paying reverence with fear. व्युत्सर्ग का एक अतिचार; सत्यभय आदि से युक्त होकर वन्दनादि करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय दोष – Bhaya Dosa. A fault; paying reverence with fear. व्युत्सर्ग का एक अतिचार; सत्यभय आदि से युक्त होकर वन्दनादि करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीमंडप भूमि – Shreemandapa Bhoomi. Name of the last land of Samavasharan having great construction with jewels. समवशरण की 8वीं भूमि ” जो चतुर्थ कोट के आगे रत्न स्तम्भों पर आधारित समवशरण की अंतिम भूमि है ” इस भूमि में स्फटिक मणिमय 16 दीवारों से विभाजित 12 कोठे होते है ” इन कोठो में…
उद्देश्यता Aimful subject. उद्देश्य में रहने वाला धर्म जैसे घटत्व।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्म:Verse, Four months stay of saints at a particular place during rainy season. काव्य, साधु का एक स्थितिकल्प वर्षाकाल के चार मास पर्यंत एक स्थान पर ही रहना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुध्द्ववीर्य – Buddhavirya. Name of the questioner of Lord Pushpadant. तीर्थकर पुष्पदंत के समवसरण में मुख्य प्रशनकर्ता “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्माल:A city in the north of Vijayardh (mountain). विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मचर्याणुव्रत – Brahmacaryanuvrata. Vow of partial celibacy, to limit the desires with own wife only. ५ अणुव्रतों में व्रत; एक देश ब्रम्हचर्य पालना अथवा स्वदारसंतोंष रखना “
इष्ट वियोगज Origination of sorrow by the separation of desired one. इष्ट पदार्थ के वियोग होने पर उत्पन्न होने वाला दुःख। उसकी प्राप्ति की सतत चिन्ता करना दूसरा आत्र्तध्यान है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आप्तपरीक्षा A book written by ‘Acharya Vidyanandi’. आचार्य विद्यानन्दि (ई. 775-840) द्वारा रचित ईश्वर परीक्षा विषयक न्याय ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मवान् : Name of a region of Western Videh (region), A summit of Vikritvan Vakshar, Nabhigiri mountain of Ramyak Kshetra (region) अपर विदेह स्थित एक क्षेत्र, विकृतवान् वक्षार का एक कूट, रम्यक क्षेत्र का नाभिगिरी ।