स्पर्ष स्वामित्व विधान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष स्वामित्व विधान – Sparssana Svaamitva Vidhaana. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष स्वामित्व विधान – Sparssana Svaamitva Vidhaana. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।
गगनखंड Part of sky. नभ या आकाश खंड; जहाँ ज्योतिष देव अपनी-अपनी परिधियों में पंक्तिरूप से संचार करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेषसम श्रोता–Meshsam Shrota. A type of silly listener. श्रोता का एक प्रकार, जो मेढ़े के समान टकटकी लगाकर देखते हुए सुनता है किन्तु अज्ञानतावश कुछ ग्रहण नहीं कर पाता”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्षन – Sparssana. Touching, the sense of touch.5 इन्द्रियो मे प्रथम इन्द्रिय। शीत, उष्ण आदि का ज्ञान इसी से होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शैल – Shaila. A rock, a crag (mountain), Another name of Sumeru mountain. चट्टान, घातिया कर्मो की चतुस्थानीयअनुभाग शक्ति का उदाहरण, सुमेरु पर्वत का अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्नातक – Snaataka. Omniscients (those who have destroyed all 4 destructive karmas).निग्र्रन्ध साधुओ के 5 भेदो मे एक भेद है। जिन्होने 4 धातिया कर्मों का नाष कर दिया है। उन केवलियो (13वे एवं 14वे गुणस्थानवर्ती) को स्नातक कहते है।
गंगातट Bank of river, the ‘Ganga’. गंगा नदी का किनारा जहाँ से लक्ष्मण ने अनेक देवों एवं विद्याधर राजाओं को अपने वश में किया था । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिर नामकर्म प्रकृति – Sthira Naamakarma Prakrti. Physique making karmic nature causing physical stability & strength while fasting or observing any austerity.जिस कर्म के उदय से उपवास आदि तपक रने पर शरीर मे वात, पित्त व कफ की स्थिरता बनी रहती है और शरीर कमजोर या अशक्त नही होता है उसे स्थिर नामकर्म प्रकृति…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवर्त – Vivarta. Movement, Cyclone, Wandering. भंवर, चारों ओर घूमना, परिवर्तन ” परिणाम या परिणमन को विवर्त कहते हैं “