स्वरुप संवेदन!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुप संवेदन – Svaruupa Samvedana. Spiritual consciousness. आत्म विषयक उपयोग।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुप संवेदन – Svaruupa Samvedana. Spiritual consciousness. आत्म विषयक उपयोग।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संदिग्ध अन्न – Sandigdha Anna. Doubtful edible material infected with bacteria or insects. ऐसे खाद्य पदार्थ जिसमें त्रस जीवों के रहने का संदेह हो “
ऐन्द्रिय दुःख Sensual pain. इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त दुःख।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == कायक्लेश : == सुखेन भावितं ज्ञाने, दु:खे जाते विनश्यति। तस्मात् यथाबलं योगी, आत्मानं दु:खै: भावयेत्।। —समणसुत्त : ४५३ सुखपूर्वक प्राप्त किया हुआ ज्ञान दु:ख के आने पर नष्ट हो जाता है। अत: योगी को अपनी शक्ति के अनुसार दु:खों के द्वारा अर्थात् कायक्लेशपूर्वक आत्म-चिन्तन करना चाहिए।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यद्रष्ट–Yadrasht. A fault of criticism (reg. Jain saints). आलोचना का एक दोष” जो अपराध अन्य जनो ने देखे है, मुनि द्वारा उतने ही दोष गुरु के पास जाकरकहना”
ऐ The ninth vowel of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का नवां स्वर।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदिमित्र – Namdimitra Name of the predestined 2nd Narayan, the 7th Balbhadra, the 82nd chief disciple (Gandhar) of Lord Rishabhdev, Name of a great saint possessing knowledge of 14 Purvas. आगामी दुसरे नारायण, सातवे बलभद्र. वृषभदेव के 82 वें गणधर, पांच श्रुत्केवली मुनियों में 14 पूर्व के ज्ञाता दुसरे मुनि का नाम ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैजयंत –Vaijayainta Name of the 66th planet, Name of the cities in the north & south of Vijayardhmountain, The southern door to the surrounding wall of Jambudvip, Name of a door of Samavasaran land. ज्योतिष के ८८ ग्रहों में ६६वा ग्रह विजयार्ध की उत्तर व दक्षिण श्रेणी के दो नगर, जंबुद्वीप की…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाववाद – Svabhaavavaada. A doctrine related to the nature of a matter. काॅटे आदि मे तीक्ष्णता एवं पक्षु-पक्षी आदि मे अनेकपना उनमे स्वभाव से ही है ऐसा एकांत से स्वभाव को मानना एवं ज्ञान वास्तव मे जीव का स्वरुप है, उस हेतु से जो अखण्ड अद्वैत स्वभाव मे लीन है ऐसा निश्चय स्वभाव वाद…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष]] == द्रव्यदृष्टि : == भारी पीलो चीकणो कनक, अनेक तरंग रे। पर्याय दृष्टि न दीजिए, एकज कनक अभंग रे।। —आनन्दघन ग्रंथावली :: अरजिन स्तवन स्वर्ण के साथ पर्याय रूप में तीन गुण निहित रहते हैं—भारीपन, पीलापन और चिकनापन अर्थात् सोना वजन में भारी, रंग से पीता और गुण से चिकना…