प्रत्यभिज्ञान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यभिज्ञान- pratyabhijnana Recognition वह यही है इस प्रकार के स्मरण को प्रत्यभिज्ञान कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यभिज्ञान- pratyabhijnana Recognition वह यही है इस प्रकार के स्मरण को प्रत्यभिज्ञान कहते है।
द्रव्य सामायिक Physically avoiding all evils. चेतन- अचेतन द्रव्यों में इष्ट – अनिष्ट रूप विकल्प नहीं करना द्रव्य सामायिक है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतीकार- pratikara Retaliation, retribution, revenge, counter action. प्रतिरोध या विरोध करना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावास्त्रव – Bhavasrava. Flowing of Karmas. आत्मा के जिस परिणाम से पुदगल द्रव्य कर्म बनकर आत्मा में आता है उस परिणाम को भावास्त्रव कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव प्राण – Bhava Prana. Psychical vitalities. सम्यग्दर्शन, ज्ञान व चारित को भाव प्राण कहा है ” अथवा आत्मा की जिस शक्ति से इंद्रिय आदि अपने कार्य में प्रवर्तन करें “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान अप्रमत्त – Svasthaana Apramatta. The first phase of the 7th spiritual stage of development-unstable stage of meditation. सतवे गुणस्थान के दो भेदो मे प्रथम भेद। जब तक चारित्रमोहनीय की 21 प्रकृतियो के उपषमन तथा क्षपण के कार्य का प्रारम्भ नही होता, किन्तु संज्वलन के मंदोदय के कारण प्रमाद भी नही होता, केवल सामान्य…
द्रव्य विशेष Excellence of a matter. जीव पुद्गलादि में अमूर्तिक-मूर्तिक विशेष धर्म । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णरेखा – Svarnarekhaa. A line of gold originated from Girnar mountain of Saurashtra. सौराष्ट्र देश मे गिरनार पर्वत से निकली है। इसके रेत मे सोने का सूक्ष्म अंष अब भी पाया जाता है। यह सुवरणा नाम से प्रसिद्वि है।
द्रव्य प्रत्याख्यान Resolution for the renunciation of non-acceptable matters. अयोग्य आहार, उपकरण वगैरह पदार्थों को ग्रहण नहीं करूँगा ऐसा संकल्प करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]