चारित्र क्षायिक!
चारित्र क्षायिक Conduct formed due to destruction of delusions. चारित्रमोहनीय के नाश से जो चारित्र प्राप्त हो । ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चारित्र क्षायिक Conduct formed due to destruction of delusions. चारित्रमोहनीय के नाश से जो चारित्र प्राप्त हो । ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष स्पर्ष विधान – Sparssana Sparssana Vidhaana. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।
चौर्य व्यसन To be habitual in theft. चोरी करने की बुरी आदत ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पद्र्वक वर्ग शलाका – Sparddhaka Varga Salaakaa. . Number of karmic aggregates in a group.एक स्पर्धक मे जितनी वर्गणाएं हो उनकी संख्या।
दारिका Prostitute. वेश्या – जो धन के लिए पुरूष का सेवन करती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजा – Bija. A river of Arya Khand (region). आर्य खण्ड की एक नदी “
दर्शनक्रिया Watching beauty with lust or passion, an activity of householder. श्रावक की 25 क्रियाओं में एक, रागवश रागी का रमणीय रूप को देखना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दश स्थान Ten specific places in body to concentrate the mind. शरीर में नेत्र युगल, दोनो कान, नासिका का अग्रभाग, ललाट, मुख, नाभि, मसतक, हृदय, तालु, भौहों का मध्य भाग ये दस स्थान हैं। इन स्थानों में से किसी एक पर चित्त एकाग्र करने से ध्यान की अवस्था प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेश्या –Vesya Prostitute, immoral woman. गणिका, बाजारू या व्यभिचारिणी स्त्री “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिर भाव – Sthira Bhaava. Stable emotions or temperaments, stability of mental state.चित्त को निश्चल रखना अर्थात् आत्मस्थिरता या समता भाव, सामायिक।