वृष्यरससेवा!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृष्यरससेवा –VrsyarasaSevaa. Taking nutritious spicy food causing excitement. अब्रम्ह के १० भेदों में एक भेद ; पौष्टिक आहार का ग्रहण करना, जिससे बल ओ वीर्य की वृद्धि हो
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृष्यरससेवा –VrsyarasaSevaa. Taking nutritious spicy food causing excitement. अब्रम्ह के १० भेदों में एक भेद ; पौष्टिक आहार का ग्रहण करना, जिससे बल ओ वीर्य की वृद्धि हो
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदसमास: A part of scriptural knowledge (Shrutgyan). श्रुतज्ञान के 20 भेदो मे छठा भेद, इससे पूर्व समास पर्वत समस्त द्वादषांग श्रुत स्थित है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषय विराग – Vishaya Viraga. Renunciation of sensual enjoyments. पाँचों इन्द्रियों के सब शुख की अभिलाषा का त्याग विषय विराग है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोवर्गणा – Manovargana. See – Manodravyavarganaa. देखें – मनोद्रव्यवर्गणा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पत्ति:A part of army. सेना का एक अंग । इसमें एक रथ, एक हाथी, 5 पैदल और तीन घोडे होते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मौन व्रत–Maun Vrat. A vow to keep silence. कुछ समय–सीमा विशेष के लिए मौन रखना”
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पटाशुक :A silky cloth to be tied on the waist. क्मर में बांधा जाने वाला रेषमी वस्त्र
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमुना–Yamuna. Name of a river of Bharat Kshetra Aryakhand (region). भरतक्षेत्र आर्यखंड में स्थित एक नदी”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मार्दव : == कुलरूवजादिबुद्धिसु, तवसुदसीलेसु गारवं किंचि। जो णवि कुव्वदि समणो, मद्दवधम्मं हवे तस्स।। —समणसुत्त : ८८ कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, श्रुत और शील का जो श्रमण थोड़ा—सा भी गर्व नहीं करता, वह मार्दव धर्म से संपन्न हुआ करता है।