मुनिमार्ग!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिमार्ग–Munimaarg. The prescribed auspicious path for saints. इसके दो भेद है; उत्सर्ग–शुद्धोपयोग रूपपरमवीतरागसयम हो, अपवाद जहा शुद्धोपयोग के बाहरी साधनों का व्यवहार हो या शुभोपयोग रूप सराग सयम हो”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिमार्ग–Munimaarg. The prescribed auspicious path for saints. इसके दो भेद है; उत्सर्ग–शुद्धोपयोग रूपपरमवीतरागसयम हो, अपवाद जहा शुद्धोपयोग के बाहरी साधनों का व्यवहार हो या शुभोपयोग रूप सराग सयम हो”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वात्सल्य – Vaatsalya.: Affection,Tender feeling (an auspicious quality). साधर्मी के प्रति निःस्वार्थ प्रेमभाव रखना (सम्यग्दर्शन का एक अंग एवं सोलहकरण भावना की एक भावना )”
एकतत्व अनुप्रेक्षा Feeling of solitude, one of the twelve reflections or 12 feelings of introspection (Barah Bhavana). बारह भवनाओं में एक भावना- मैं अकेला ही जन्मता मरता हूँ, मेरा कोई साथी नहीं है, इस प्रकार चिंतन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गंधमाली A deity of Gandhmali summit (Koot) of Gandhmadan gajdant mountain. गंधमादन गजदन्त के गंधमाली कूट का स्वामी देव । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचा वैयावृत्त्य विवेक – Vaachaa Vaiyaavrttya Vivek.: Not to allow others to serve oneself (a kind of discrimination). विवेक का एक भेद, तुम मेरी वैयावृत्त्य मत करो ऐसे वचन बोलना “
उपशांतकर्म Karmas existing but not fruitful. कर्म की शक्ति की अप्रगटता या फल न देना किन्तु सत्ता में बैठे रहना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचक-वाच्य संबंध – Vaachaka-Vaachya Sanbandha.: Relation between words & their meanings. शब्द और अर्थ का संबंध “अर्थात शब्द वाचक एवं उसका अर्थ वाच्य कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचश्रुतज्ञान व्रत – Panchashrutagyaana Vrata. 168 vows (fasting) with particular procedure. एक उपवास एक पारणा से 168 उपवास करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक्शुद्धि –Vaakshuddhi.: Renunciation of cruel speech or language controlling. कठोर कर्कश वचनों का त्याग कर सावधानी पूर्वक बोलना ” देखें –वचन शुद्धि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमेरु – Panchameru. Five auspicious adorable mountains with temples having number of Jaina idols. ढाई द्वीप सम्बंधी पांच मेरु (पर्वत)-सुदर्शन, विजय, अचल, मंदर, विद्युन्माली मेरु पर्वत पूजा; पाँचों मेरु (पर्वतों) पर स्थित अस्सी चैत्यालयों की समस्त प्रतिमाओं की पूजा “