स्वानुभूति!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वानुभूति – Svaanubhuuti. Self realization or intuition. आत्मानुभूति। आत्मा का अनुभव या ज्ञान जो सम्यक्त्व स्वरुप है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वानुभूति – Svaanubhuuti. Self realization or intuition. आत्मानुभूति। आत्मा का अनुभव या ज्ञान जो सम्यक्त्व स्वरुप है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संव्यवहरण दोष – Sanvyavaharana Dosha. A fault related to saint food, careless activities in offering food to saint. श्रावक के निमित्त से होने वाला जैन साधुओं के आहार का एक दोष ” साधु को आहार देने के लिए बर्तन आदि को शीघ्रता से बिना देखे उठाना संव्यवहरण दोष है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकार स्थापना – Saakaara Sthaapanaa. If the representative and the represented are similar in fiqure, then such installation are called Sakar Sthapana. तदाकार स्थापना निक्षेप, पाषाण या धातु की बनी हुई तदाकार प्रतिबिम्ब मे जिनेन्द्र भगवान की या इन्द्र की स्थापना करना तदाकार स्थापना है।
उत्पत्ति Origination, Birth. जीवों की उत्पत्ति अर्थात् जन्म लेना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांख्यदर्शन – Saankhyadarshana. Name of a philiosophy, its founder was Mahrshi Kapil. एक एकांत दर्षन इसके मूूल प्रयोग महर्षि कपिल थे। इस दर्षन के मूल पदार्थ दो है- पुरुष व प्रकृति। पुरुष चेतन तत्तव है और प्रकृति जड़ है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्तोदा नदी – 14 महानदियो में चैहदवी महानदी, यह षिखरी पर्वत के पुण्डरिक द्रह से निकलकर पष्चिम की ओर ऐरावत क्षेत्र में बहती है। Raktoda nadi-Name of a great river which flows in Eravat region
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षाबंधन पर्व – श्रावण षु 15 के दिन आने वाला एक पर्व।इस दिन बहने अपने भाईयो को रक्षासूत्र बांधती है।जैनधर्म के अनुसार यह पर्व हस्तिनापुर से प्रारम्भ हुआ, जहा आज से 14 लाख वर्श पूर्व अंकपनाचार्य आदि 700 मुनियो पर किये गए उपसर्ग को विश्णुकुमार मुनिराज ने दूर कर उनकी रक्षा की थी। उसी…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभंजन- मानुशोत्तर पर्वत का एक कूट व उसका स्वामी एवं भवनवासी वायुकुमार देवों का इन्द्र। prabhamjana – name of a summit of manushottar mountain and its ruling deity.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्थान नामकर्म प्रकृति – Sansthaana Naamakarma Prakrti. Physique making Karma causing figure of the body. जिस कर्म के उदय से 6 प्रकार के संस्थानों में से कोई एक रूप शरीर का आकार हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशत्व- द्रव्य का एक सामान्य गुण; जिस शक्ति से द्रव्य का कोई न कोई आकार बना रहता है। pradesatva – characteristics of occupancy in any matter