निश्चय वात्सल्य!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय वात्सल्य – Nishchaya Vaatsalya. To keep real affection for soul. मुनियों द्वारा रागादि विकल्पों से रहित आनंदरूप सुखमय आत्मा के प्रति प्रीति करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय वात्सल्य – Nishchaya Vaatsalya. To keep real affection for soul. मुनियों द्वारा रागादि विकल्पों से रहित आनंदरूप सुखमय आत्मा के प्रति प्रीति करना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सद्गति : == समणं भट्ठचरित्तं ण हु सक्को सुग्गइं णेदुं। —मूलाचार, समयसराधिकार : १४ चारित्र से भ्रष्ट होने वाला श्रमण सद्गति प्राप्त करने में समर्थ नहीं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शाप – Shaapa. Curse. क्रोधवश किसी के लिए अनिष्ट वचन कहकर दुराशीष देना ” जैन साधु किसी को शाप नहीं देते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय नय – Nishchaya Naya. Absolute standpoint. जो नय वस्तु के असली स्वभाव या अभेद रूप को ग्रहण करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लौकिक मंगल –Laukika Mangal All auspicious significant articles-filled pitcher,white mustard,mirror etc. श्वेत सरसों ,भरा हुआ कलश ,वन्दनमाला ,क्षत्र ,दर्पण आदि “
आवृत्तकरण Obscuration (related to Karmic theory). अन्य प्रकृति रूप करके कर्म का नाश करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय अनशन – Nishchaya Anasana. Absolute fasting with conquering the worldly desires. मुनि अवस्था में विषय सुख की अपेक्षा न करते हुए अर्थात् मन व इंद्रियों को जीतते हुए आत्मसुख में ही निवास करना”
गुरुमूढ़ता Belief in false preceptor of spiritual teachers. हिन्सादि पाप क्रियाओं में एवं आरम्भ परिग्रह में लिप्त रहने वाले साधुओं को गुरु मानकर उनकी भक्ति , वंदना , प्रशंसा आदि करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शलाका पुरुष – Shalaakaa Purush. Particular 63 great personages like Tirthankar (Jaina-Lord), Chakarvarti (emperor) etc. in Jaina realm. तीर्थंकर, चक्रवर्ती आदि प्रसिद्द पुरुषों को शलाका पुरुष कहते है ” प्रत्येक कल्पकाल में ये 63 होते हैं ” 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 नारायण, 9 प्रतिनारायण, 9 बलभद्र “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मर्षि – Brahmarsi. Saints having supernatural knowledge (pertain- ing to wisdom and medicines), Another name of Laukantik deities. बुद्धि और औषधि ऋध्दियुक्त साधु ब्रह्मर्षि कहलाते हैं , लौकांतिक देवों को भी ब्रह्मर्षि कहते हैं “