ब्रह्मेश्वर!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मेश्वर – Brahmesvara. Name of the ruling demigod of Lord Shitalnath. शीतलनाथ भगवान का शासन यक्ष “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मेश्वर – Brahmesvara. Name of the ruling demigod of Lord Shitalnath. शीतलनाथ भगवान का शासन यक्ष “
धर्मकथा Religious story. धर्म में दृढ़ करने वाली कथा ; आक्षोपिणी, विक्षोपिणी, संवेदिनी, निर्वेदिनी के भेद से 4 प्रकार की है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धरणा Name of the Ganini (chief Aryika) in the holy assembly of Lord Sheetalnath. शीतलनाथ भगवान के समवशरण की गणिनी (प्रमुख आर्यिका) का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == माया : == सच्चाण सहस्साण वि, माया एक्कावि णासेदि। —भगवती आराधना : १३८४ एक माया हजारों सत्यों का नाश कर डालती है। माया तैर्यग्योनस्य। —तत्त्वार्थ सूत्र : ६-२७ माया तिर्यंच योनि को देने वाली है। (तिर्यंच माया के कारण ही बांके होकर चलते हैं।)
धनपाल A type of peripatetic celestials, Name of the writer of ‘Bhavishyadatta Charitra’. यक्ष जाति के व्यंतर देवों के 12 भेदों में नवां भेद, ‘ भविष्यदत्त चरित्र’ प्राकृत के कर्ता।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदज्ञान:Discriminating science (knowledge).जीवादि सातों तत्वों में सुखादि की अर्थात् स्व तत्व की स्वसंवेदनगम्य पृथक् प्रतीति होना ” अथवा स्व पर पदार्थो का यथार्थ ज्ञान होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भरतकूट – Bharatakuta. Name of summits of Vijayardh & Himvan moun- tains. विजयार्ध पर्वत की उत्तर व दक्षिण श्रेणियों पर स्थित कूट एंव हिमवान् पर्वत पर स्थित एक कूट “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भृंगनिभा:Name of a vapi(like large lake) of sumeru mountain. सुमेरु के नन्दनादि वनों मेंस्थित एक वापी (बावड़ी) ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगदेव – Bhujangadeva. A type of peripatetic deities living at some up – per distance from the earth. महोरग जाति के व्यंतरों का एक भेद, लवण समुद्र के ऊपर आकाश में स्थित भुजंग नामक देवों की २८ हजार नगरियाँ हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सामायिक : == तस्स सामाइयं होइ, इइ केवलिभासियं।। —अनुयोगद्वार सूत्र : १२७ जिसकी आत्मा संयम में, नियम में एवं तप में सन्निहित (तल्लीन) है, उसकी सच्ची सामायिक होती है, ऐसी केवली भगवान् ने कहा है। जो समो सव्वभूएसु, तसेसु थावरेसु अ। तस्स सामाइयं होइ, इह केवलिभासिअं।। —अनुयोगद्वार सूत्र…