आवली अचल!
आवली अचल See – Åbådhå Åvalî . देखें आबाधा आवली।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रादोषिक काल- जिसमें रात का भाग है वह प्रदोश काल है अर्थात् रात के पूर्वभाग के समीप दिन का पष्चिम भाग, वह सुबह-षाम दोनों कालों में प्रदोशकाल कहलाता है। Pradosikakala- The period of Dawn and dusk
आराधना कथाकोष A book written by ‘Brahmachari Nemidatta’. ब्र. नेमिदत्त(ई.1518) द्वारा रचित कथाओं का एक संग्रह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणि संयम- शट् काय के जीवों की रक्षा करना। PraniSamyama- Vitality control, Life saving of all beings
इंद्राभिषेक An auspicious and sacred act (reverentialanointment of Indra). गर्भान्वयादि क्रियाओं में एक क्रिया, इन्द्र पद पर आरुढ़ करने के लिए देवों द्वारा इन्द्र का अभिषेक किया जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मख्याति A great commentary on ‘Samaysar’ written by Acharya Amritchandra. कुंदकुंदाचार्य कृत समयसार ग्रंथ पर संस्कृत में री अमृतचंद्र आचार्य कृत टीका।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुप्रदेशी – काय; जो बहुप्रदेशी होता है अर्थात् 6 द्रव्यों में 5 द्रव्य (जीव, पद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश) बहुप्रदेशी होने से अस्तिकाय है। Bahupradesi- Something multi space pointing
इंद्रनंदि संहिता A book written by ‘Acharya Indranandi’.आचार्य इन्द्रनंदि (ई.श.10) की अपभ्रंश भाषाबद्ध कृति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाला (देवी) – गजदंत कूट, पहद एवं वैमानिक इन्द्रों की देवी का नाम। Bala (Devi)- Name of female deities of Gajadant summit, of padma lake & of spatial Indras
आराधना सार समुच्चय A book written by ‘Acharya Ravichandra’. आचार्य रविचन्द्र (ई.श.12-13) द्वारा रचित एक चतुर्विध आराधना विषयक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]